For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मालदार गरीब का मुखौटा

कई दिनों तक सोचने के बाद मेरे जेहन में ऐसा कोई विचार नहीं आ रहा था, जिसे मैं लिख सकता। पर अचानक ही सूझा कि देश में बढ़ती गरीबी पर लिखूं। सहसा ही ध्यान आया कि अब तो केवल मालदार गरीबों का ही बोलबाला है। ऐसे मालदार गरीबों से मेरा रोज ही पाला पड़ता है। जब मैं किसी गली से गुजरता हूं तो उनसे मेरा नमस्कार होता है, जिनके पास बंगला, कार समेत सभी एशोआराम के साजो-सामान हैं।
एक दिन मेरे पड़ोसी ने मुझे गरीब बनने की नसीहत दे डाली और वो सारे फण्डे बता डाले, जिससे मालदार होते हुए गरीबी का चोला ओढ़ा जा सके। मैंने भी उसकी नसीहत को सर आंखों पर लेते हुए ऐसा गरीब बनने की ठान ली। पहले उन्हें देखकर मुझे थोड़ी सी जलन होती थी कि उनके पास मुझसे ज्यादा संसाधन है, फिर भी वे गरीब होने का सर्टिफिकेट लिए बैठे हैं। पर उनकी नसीहत के बाद मेरी जलन कुछ कम हुई और कुछ दिनों में ही मैंने पड़ोसी के बताए अनुसार, औपचारिकता पूरी की और मेरे घर सरकार के कारिंदे गरीब होने का प्रमाण पत्र दे गए और दो मंजिला घर के गेट पर गरीबी का ठप्पा लग गया। जिस दिन मैं गरीब बना, उस दिन ऐसा लगा, जैसा यह मेरी जिंदगी की एक बड़ी उपलब्धि है।
हमारे पास वैसे भगवान का दिया हुआ सब कुछ है, लेकिन सरकार की दरियादिली के चलते हमने भी गरीब बनने का मन बना लिया। माल तो हमें पुरखौती से मिला है, पर मालदार गरीब का चोला ओढ़ना, इसलिए भी जरूरी है कि जब सरकार के दिए को, लेने से कोई हिचक नहीं रहा है तो भला, मैं क्यों पीछे रहूं। इन दिनों मुझे खबरनवीसों से पता चला कि गरीबों की तादाद लगातार बढ़ रही है। वैसे भी हमारे देश में बहुमत का ही जिंदाबाद होता है तो भला मैं भी गरीब के बहुमत में हाथ बंटाने कैसे हिचकिचाता। सो, मैंने भी बहती गंगा में हाथ धोने का ही नहीं, बल्कि नहाने का ही पक्का इरादा कर लिया। सरकार ने भी इसके लिए मुझे पूरा अवसर प्रदान किया और हमारे परिवार को जैसे, संजीवनी मिल गई। अब तो रोज-रोज काम करने की झंझट कहां, महीने भर की व्यवस्था एक ही दिन में हो जाती है, वह भी बिना हाथ-पैर मारे। हम बस निठल्ले बनकर रह गए हैं। एक दिन की कमाई के बाद हफ्ते भर तक काम करने की अब कहां जरूरत। परिवार के लोग भी खुश हैं कि घर में पहले कहीं से कुछ नहीं आ रहा था, अब मुफ्त में कुछ चीजें तो मिल जा रही हैं, साथ ही रियायत भी। ऐसे में मैंने भी कई लोगों को गरीब बनने की बात कही और उन्होंने मान भी ली। आज स्थिति है कि मेरे प्रयास से आसपास के सभी परिवार के लोग गरीब बन गए हैं। इसके लिए उन्हें एक प्रमाण-पत्र भी मिला है, जिसे दिखाकर वे कई और तरीके से लाभान्वित हो सकते हैं या कहें कि हो रहे हैं। उनके पास जीने की वह चीज है, जिससे उनकी जिंदगी पूरी विलासिता में बीत सकती हैं, लेकिन वे भी भला, भीड़ में शामिल होने से कैसे परहेज करते।
इस बीच मुझे यह जानकर तकलीफ हुई कि अब सरकार के फरमान के बाद मालदार गरीबों की पहचान की जा रही है, ताकि उन्हें फिर से पुराना तमगा दिया जा सके। ऐसे में लगने लगा कि अब वे गरीबों के साथ बहुत बड़ा अन्याय करने जा रही हैं। भला हम गरीब थे, तो किसका क्या बिगड़ रहा था। इस बात से मन को ठेस तो लगी, लेकिन मैं यह सोचकर खुश था कि चलो, कुछ समय तक तो गरीब होने का फायदा मिला। मुझे लगा कि अब इस गरीब के मुखौटे को साथ लेकर चलना मुश्किल है तो मैंने इस मुखौटे को उतार फेंकने में ही भलाई समझी।
राजकुमार साहू
लेखक व्यंग्य लिखते हैं
लेखक इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार हैं

जांजगीर, छत्तीसगढ़
मोबा - 098934-94714

Views: 351

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 21, 2010 at 6:07pm
सुंदर एवं सटीक व्यंग ,
कृपया निम्न लिंक जरूर देखे और अपना विचार रखे
http://www.openbooksonline.com/forum/topics/5170231:Topic:34997

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on November 18, 2010 at 7:06pm
साहब बड़े दयालू हैं
खाते रोज़ कचालू हैं
दफ्तर में ये सोते हैं
कुछ काम कहो तो रोते हैं
बीमार पड़ी जो फाइल है
यह तो इनका स्टाइल है
सारी की सारी पेंडिंग है
ऊपर से अंडरस्टैंडइंग है
साहब की फरमाइश है
कुछ नोटों की गुंजाईश है
बड़ी कार में चलते हैं
छाती पर मूंग ये दलते हैं
घर में दो AC चलता है
औरों का दिल क्यों जलता है?
हम तो समझे एक बात नहीं
तुमको क्यों इतनी टेंशन है
जो बी पी एल की सूची में
साहब का रजिस्ट्रेशन है

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
19 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
19 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
19 hours ago
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service