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सुनो युवाओं....कुण्डलिया

नौटंकी का खेल है, दरबारों का आज
सत्ता चोर छिछोर की, डाँकू का है राज
डाँकू का है राज, झपट यह माल बनाते
पावन धरती खोद, उसे पाताल बनाते
कहते है कविराय, शुरू है उलटी गिनती
युवा आज के समझ रहे सारी नौटंकी
-------
नवपीढी के हाँथ मे, रहे धर्म की डोर
आकर्षित कुछ हो रहे, जो पश्चिम की ओर
जो पश्चिम की ओर, सभ्यता अपनी भूले
कैसे तुम हो पुत्र, प्रिय ! जो जननी भूले
कहते हैं कविराय, चुनो अब ऐसी सीढी
करो राष्ट्र निर्माण, धर्म से हे नवपीढी
---------
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by manoj shukla on May 3, 2013 at 5:43pm
आदर्णीय कुशवाहा जी..बहुत बहुत आभार
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 3, 2013 at 4:57pm

अति सुन्दर 

सादर बधाई 

आदरणीय मनोज जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 1, 2013 at 6:22pm

मेरे सुझाव को मान देने के लिए आभार आ० मनोज जी 

Comment by manoj shukla on May 1, 2013 at 6:15pm
आदर्णीया डा. प्राची जी आपका सादर आभार ....अन्तिम पंक्ति के बारे मे आपका सुझाव उत्तम है ....करो राष्ट्र निर्माण... ज्यादा ठीक है ...पुनः सादर आभार

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 1, 2013 at 5:30pm

युवाओं की जागरूकता पर सुन्दर कुंडलिया छंद का प्रयास हुआ है.... बहुत बहुत बधाई 

कैसे तुम हो पुत्र, प्रिय ! जो जननी भूले..............इसमें एक बार मात्रा गणना पुनः जांच लें 
देश करो निर्माण, धर्म से हे नवपीढी...................करो राष्ट्र निर्माण करके देखिये विषम चरण को 

सादर शुभकामनाएं 

Comment by manoj shukla on May 1, 2013 at 3:50pm
आदर्णीय अरुण जी...आपका सादर आभार ...बस आपका स्नेह मिलता रहे...सादर
Comment by manoj shukla on May 1, 2013 at 3:50pm
आदर्णीय अरुण जी...आपका सादर आभार ...बस आपका स्नेह मिलता रहे...सादर
Comment by अरुन 'अनन्त' on May 1, 2013 at 3:34pm

आदरणीय मनोज जी बहुत ही सटीक कुण्डलिया छंद रचा है आपने, काश आपकी कुण्डलिया पढ़कर नव युवकों की नकारात्मक सोंच बदले. खैर इस सुन्दर कुंडलियों हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by manoj shukla on May 1, 2013 at 9:42am
आदर्णीय श्री.अशोक जी आपका सादर आभार आपका प्रशंशा रुपी आशिर्वाद पाकर मै धन्य हुआ ....हार्दिक आभार
Comment by Ashok Kumar Raktale on May 1, 2013 at 8:31am

आदरणीय मनोज शुक्ल जी सादर, बहुत उत्तम कुण्डलिया, और विशेषकर मैं दुसरे छंद पर कहूंगा क्या भाव है,और इतना अच्छा संदेश है जिसे हर युवा को समझना चाहिए. बहुत खूब! हार्दिक बधाई स्वीकारें.

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