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सोच जनता की नहीं आपके आचरण की बदलनी होगी..

कॉंग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिपण्णी पर ऐतराज़ जताया है की सी बी आई को 'तोता' क्यों कहा? यहाँ दिग्गी राजा का कहना सही लगता है की सुप्रीम कोर्ट को टिपण्णी करने के बजाय फैसला देकर जवाबदेही तय करना चाहिए. दरअसल पिछले कुछ समय से आम जनता भी महसूस कर रही है की कोर्ट की सरकारों को दी जाने वाली बार-बार लताड़ का नतीजा आखिर क्या निकलता है. इससे तो आम सन्देश ये भी जा रहा है की कोर्ट द्वारा सख्त टिप्पणियों को करने के बाद भी देश में भ्रष्टाचार, जघन्य अपराधों में कोई कमी नहीं आ रही है.
हमारे देश में न्यायालय और भारतीय सेना भी संसद की तरह ही सम्मानीय और आदरणीय है. लेकिन जब कभी इनके आचरण में मनमानी, लापरवाई, भ्रष्टाचार, और अन्याय की बात सामने आती है तब आम जनता का सोच खिन्न हो जाता है. सेना खरीद - फरोख्त और निर्माणों में भारी कमीशन खाए और घटिया क्वालिटी परोसे तब क्या देश की जनता से उम्मीद की जा सकती है की भारतीय सेना को आदर की निगाह से ही देखती रहे? [ उदहारण के लिए मैंने अपने शहर महू छावनी में सेना और सिविल के बीच भरी भेदभाव देखा है जिसे आम जनता भी लम्बे समय से भोग रही है. ६० सालों में भी देश का रक्षा मंत्रालय यदि सिविल एरिया बढ़ने की अनुमति न दे, हजारों की संख्या वाली सेना आबादी को लाख की संख्या वाले सिविल इलाके से चार गुना पेयजल सप्लाय किया जाय तो आम सिविलियन से कैसे अपेक्षा की जाती है की वो सेना की इज्ज़त करे ? ] देश के आम न्यायालयों में तारिख बढ़ाने, फाईल को ऊपर रखने आदि के लिए न्यायाधीश के सामने ही कोर्ट कर्मचारी रूपए वसूले तब आम जनता की निगाह में न्यायालय की क्या गरीमा रह जाती है? संसद में बैठकर सांसद जन-मुद्दों की अनदेखी करे, जानवरों की तरह एक-दूसरे पर कीचड उछाले, तब जनता उसी संसद की गरीमा के बारे में क्या सोच रख सकती है? इसलिए बहुत ज़रूरी है की न्यायालय, संसद, सेना भी अपनी गरीमा रहे, अपनी इज्ज़त का फालूदा खुद न बनाये, तभी देश की आम जनता से आप बेहतर सोच की उम्मीद कर सकते हैं.

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Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on May 16, 2013 at 8:15pm
आपने सही कहा कि सेना और न्यायालयों को अपनी गिरेबान में झांकना चाहिए। लेकिन जब तक वो कार्यपालिका के कार्यकलापों पर सख्त टिप्पणियाँ न करेगी तो कार्यपालिका को ये कैसे पता चलेगा कि वो कितना गलत कर रही है।
Comment by shalini kaushik on May 15, 2013 at 2:07am

 .पूर्णतया सहमत बिल्कुल सही कहा है आपने

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