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आओ फिर बटवारा कर लो......

अब जो तुम ना लोटोगे तो

आओ फिर बटवारा कर लो

तुम अपने दिल से जो चाहो

वो सभी सोगातें रख लो....

 

हाँ मैं दोषी नहीं फिर भी चलो

मेरी गवाही तुम ले लो

गिनाते थे जो ऐब मुझ को

वो तुम अब लिख के दे दो.....

 

भर के रखे तुम्हारे लिए

अरमानो के पैमाने जो

जाते हुए उनका अंतिम

संस्कार खुद से कर दो

अब भी कोई बता दो

शर्त रखते हो तो

इस वक़्त उसे भी

आखिरी सलामी दे दो....

 

सूखे फूलो को मैं रख लूंगी

तुम उनके जज्बात ले लो

मेरी आँखों के अक्स का

तुम क्या करोगे छोड़ो

तुम धूप का चश्मा रख लो

याद आएँगी मुझे वो बरसातें

मुझे गीली सही तुम

वो सूखी चादर रख लो....

 

मैं अंधेरों में ही तुम्हे

याद कर लुंगी

तुम तारों की झिलमिल

बारातें रख लो

मेरा कल तो तुम

ले ही चुके हो अपने

कल के लिये

मेरी दुआएं रख लो....

 

मेरे लिये तुम्हारे धोखे सही

अपने लिये मेरी वफाएं रख लो

सलामत रहे मोहब्बत मेरी

कम जो पड़े तो मेरी

उम्र भी तुम रख लो....

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Comment

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Comment by Priyanka singh on May 20, 2013 at 2:58pm

बहुत बहुत शुक्रिया विशाल जी .....

Comment by Priyanka singh on May 20, 2013 at 2:54pm

जी जरुर राजेश जी आपकी सलाह पर ध्यान दूंगी .........विचार प्रकट करने हेतु धन्यवाद आपका .....

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on May 20, 2013 at 2:13pm

अत्यन्त भावपूर्ण रचना है......लिखती रहिये......आपके उज्ज्वल भविष्य के लिये शुभकामना !!!!

Comment by राजेश 'मृदु' on May 20, 2013 at 1:02pm

मेरे हिसाब से यह रचना काफी कुछ कहती हुई सी है परंतु प्रवाह  इतना उथला है कि चाह कर भी साथ चल ना पाया । इसपर ध्‍यान देने की जरूरत है

Comment by Priyanka singh on May 19, 2013 at 11:07am

धन्यवाद लक्ष्मन सर जी .......

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 18, 2013 at 3:29pm

रचना के भाव प्रस्तुत करनेहेतु बधाई -

बटवारे से होते न्यारे वारे,

रखलो तुम जो भी चाहो 

लो दिल में जो भी समावे,

उम्र चाहे वह भी ले लो |

दिल दरिया है हामारा

परखना चाहे परखो,

स्वाद चखना है चखलो

नही रुचे फिर लौटा दो | 

मेरे इन भावो को परखो 

इन की इज्जत रखलो - लक्ष्मण 

Comment by Priyanka singh on May 17, 2013 at 11:11pm

अरे नहीं रामजी ऐसा नहीं है…. आपका जवाब तो दे ही दिया था मैंने ....मैं ये बदलना ही चाहती थी ...

Comment by Priyanka singh on May 17, 2013 at 11:10pm
 राजकुमार जी सर बहुत बहुत आभार आपका .....आपके विचारों से प्रसन्नता हुई .....आशा रहेगी आप यूँही सराहते रहेगे ...
आशीर्वाद सदा बनाये रखे ....धन्यवाद 
Comment by ram shiromani pathak on May 17, 2013 at 9:42pm

ha ha ha  ha hamne to aise hi kah diya tha anyatha na lijiyega//saadar

Comment by Priyanka singh on May 17, 2013 at 8:18pm

कवी दीपेन्द्र सर जी शुक्रिया आपके कमेंट की प्रतीक्षा थी ....धन्यवाद सर 

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