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!! ये यादे !!  

कभी होठो पे हँसी लाती है ये यादे ।

कभी आंखो मे नमी लाती है ये यादे ।।

कभी माशूक कभी मासूम सी होती है ये यादे ।

बडी मस्खरी वहरुपिया होती है ये यादे ।।

नजाकत वक्त की न माहौल  देखती है ये यादे ।

बेतख्लुफ  बेशरम सी होती है ये यादे ।।

बन्द रखता हू मै अपने घर की, खिडकिया दरवाजे ।

फिर भी न जाने कहाँ से, चली आती ये यादे ।।

भूलना चाहो तो और याद आती है ये यादे ।

तन्हाईयो मे और भी तडफती है ये यादे ।।

कभी जीने की वजह होती है ये यादे ।

कभी मरने का बहाना होती है ये यादे ।।

साथ उजालो मे देते है अपने  ये साये |

अन्धेरो मे साथ देती है ये यादे ।।

निशाँ यादो के मिट जाये, पर नही मिटती है ये यादे ।  

दूर जितना भी भागो, पीछे चली आती है ये यादे ॥

वक्त रुखसत के आंखो मे उतर आती है ये यादे ।

आईना तेरे करमो का होती है ये यादे ।।

 

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 854

Comment

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Comment by बसंत नेमा on June 20, 2013 at 11:49am

आ0 विजय श्री जी यादो की याद मे शमिल होने के लिये  बहुत बहुत  शुक्रिया ..आभार 

Comment by बसंत नेमा on June 20, 2013 at 11:48am

आ0 सुमित जी यादो के सफर मे साथ आने के लिये बहुत बहुत  शुक्रिया ..आभार 

Comment by Sumit Naithani on June 14, 2013 at 1:02pm

 ये यादें  (y) बहुत ही सुंदर 

Comment by vijayashree on June 14, 2013 at 12:57pm

कभी होठो पे हँसी लाती है ये यादे ।

कभी आंखो मे नमी लाती है ये यादे ।।

 

बन्द रखता हू मै अपने घर की, खिडकिया दरवाजे ।

फिर भी न जाने कहाँ से, चली आती ये यादे ।।

 

वक्त रुखसत के आंखो मे उतर आती है ये यादे ।

आईना तेरे करमो का होती है ये यादे ।।

 

यादों का खुबसूरत चित्रण

Comment by बसंत नेमा on June 14, 2013 at 12:43pm

आ. कुंती जी रचना को मान देने के लिये धन्यवाद और आभार ..... 

Comment by बसंत नेमा on June 14, 2013 at 12:42pm

आ. श्री  जितेन्द्र जी .श्री  अबिद अली जी  बहुत बहुत धन्यवाद आप को रचना पसन्द आई उसके लिये आभार 

Comment by coontee mukerji on June 14, 2013 at 1:00am

बन्द रखता हू मै अपने घर की, खिडकिया दरवाजे ।

फिर भी न जाने कहाँ से, चली आती ये यादे ।।.........क्या करें इन यादों का जो बार बार मन को तड़पाता है. मैं समझती हूँ  इंसान अपनी यादों से कभी नहीं भाग सकता .आपने बहुत अच्छा लिखा है .

Comment by Abid ali mansoori on June 12, 2013 at 7:47pm
सुन्दर रचना के लिए बधाई आपको आदरणीय!
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 12, 2013 at 7:42pm
आदरणीय...बसंत जी, बहुत सुंदर रचना.....शुभकामनाऐं

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