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बसंत नेमा's Blog (27)

हम को भी दे दो वो अधिकार थोडा थोडा

करने लगे है वो भी हमपे ऐतबार थोडा थोडा ।

उनको भी हो गया है हमसे प्यार थोडा थोडा ॥ 

रहते थे जो परदो मे छुप छुप के कल तलक ।

अब होने लगा है उनका भी दीदार थोडा थोडा ॥

कहते थे वो इश्क विश्क बाते है फिजूल की ।

चढने लगा है उनपे भी ये खुमार थोडा थोडा ॥

उडी है नीँद रातो की करार छिन गया दिन का ।

अब रहने लगे है वो भी बेकरार थोडा थोडा ॥

है हक चुमना भंबरो का फूलो को बेधडक ।

हम को भी दे दो वो अधिकार थोडा…

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Added by बसंत नेमा on April 28, 2014 at 10:00pm — 2 Comments

हर शख्स यहाँ का शौकीन बडा है

मिजाज मेरे शहर का रंगीन बडा है ।

हर मौसम यहाँ का बेहतरीन बडा है ।।

आंखो मे सुरमा मुहँ मे पान रचा है ।

हर शख्स यहाँ का शौकीन बडा है ।1।

शोखिया अदाये वो इठलाती जबानी ।

यहाँ हुस्नो शबाब नाजनीन बडा है ।2।

है झील का किनारा वो लहरो की मस्ती ।

हर नजारा यहाँ दिल नशीन बडा है ।3।

हरसू है बस प्यार मोहब्बत की बाते ।

नफरत  यहाँ जुर्म संगीन बडा है ।4।  

हो इक शहर ऐसा भी इस जहाँ मे कही…

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Added by बसंत नेमा on February 24, 2014 at 12:30pm — 6 Comments

सूरज को पिघलते देखा है

सूरज को पिघलते देखा है

वक्त के साथ रिश्तो को बदलते देखा है ।

दौलत के लिये अपनो को लडते देखा है ॥

लिये आग चढा था जो सुबह आसँमा पे

शाम उस सूरज को पिघलते देखा है ।।

तैरा था जो लहरो के विपरीत हरदम ।

साहिल पे उस जहाज को डूबते देखा है ।।

हुआ करती थी जहाँ संस्कारो की बाते ।

हाँ आज मैने उन घरो को टूटते देखा है  ॥

बैठा था कल तक जो किस्मत के भरोसे

उस  शख्स को  आज  हाथ मलते…

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Added by बसंत नेमा on December 19, 2013 at 11:30am — 15 Comments

जिन्दगी जिन्दगी जिन्दगी । गजल (प्रथम प्रयास )

मुतदारिक मुसद्दस सालिम

212 /212/ 212

जिन्दगी  जिन्दगी  जिन्दगी ।

बन्दगी तिश्नगी आशिकी ॥

जिन्दगी जिन्दगी जिन्दगी ।…

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Added by बसंत नेमा on October 1, 2013 at 4:30pm — 16 Comments

मरा कौन ?

मरा कौन ?

कही पे हिन्दू मरता है ।

कही मुसलमान मरता है ।।  

चले जब तलवार नफरत की ।

तो बस इंसान मरता है ॥

 

कही पर घर जलता है ।  

कही मकान जलता है ॥  

मगर इन लपटो से मेरा ।

प्यारा हिन्दुस्तान जलता है ॥

 

न कुछ हासिल तुम्हे होगा ।

न कुछ मेरा भला होगा ।

दरख्तो पे जो बैठे है ।

बस गिद्धो का भला होगा ॥

 

कही मन्दिर पे है पाँबन्दी ।

कही मस्जिद पे पहरा है…

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Added by बसंत नेमा on September 13, 2013 at 12:00pm — 19 Comments

!! आओ बैठे बात करे !!

!! आओ बैठे बात करे !!

 

कुछ तुम्हारे कुछ हमारे  आओ बँया जज्बात करे । 

आओ बैठे बात करे,  आओ बैठे बात करे ।

गुजर गये जो लम्हे प्यारे, आओ उनको याद करे ।

आओ बैठे बात करे,  आओ बैठे बात करे ।

 

क्या याद है  वो माली काका, जिसके  आम चुराया करते थे ।

क्या याद है  वो अब्बू चाचा, जिसकी भेड छुपाया करते थे ।

क्या याद है…

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Added by बसंत नेमा on September 10, 2013 at 12:30pm — 17 Comments

संत लीला ( छ्न्द का प्रथम प्रयास )

संत लीला

******************

वेद पुराण वाचते करते गीता पाठ ।

बाबाजी के देखिये शाही ठाठ बाठ । 

शाही ठाठवाठ मे, कोई कमी न आये  ।

वैरागी बन के बाबा, दौलत खूब कमाये । 1।

 

चार बार चन्दन घिसे, छिडके गंगा नीर ।

देख के नारी मोहनी, बाबा भये अधीर ।

बाबा भये अधीर के, भूले दुनियादारी ।

मोहमाया के…

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Added by बसंत नेमा on September 4, 2013 at 11:00am — 17 Comments

आप जब से मेरी जिन्दगी हो गई ।

आप जब से मेरी जिन्दगी हो गई ।

 

आप जब से मेरी जिन्दगी हो गई ।

सारी दुनिया से मेरी दुश्मनी हो गयी ॥

आप को जो हमराज मै कह गया ।

तो दोस्तो से मेरी दुश्मनी हो गयी ॥  1 ॥

 

नूर चेहरे का तेरे चाँदनी दे गया ।

देख कर चाँद भी तुझको शरमा गया ।

जो चाँद पूनम का मै तुम्हे कह गया ।

तो चाँद से भी मेरी दुशमनी हो गयी  ॥   2…

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Added by बसंत नेमा on August 6, 2013 at 11:30am — 33 Comments

महिमा पैसो की

महिमा पैसो की

******************************

पर पैसो के मैने तो देखे नही ।

फिर क्यू वो कही पे ठहरता नही ॥

पकडते है दोनो हाथो से सभी ।

पर पकड मे किसी के वो आता नही ॥......... फिर क्यू वो कही पे ठहरता नही ॥…

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Added by बसंत नेमा on July 31, 2013 at 3:30pm — 2 Comments

काश !

काश! 

आरजू मै करु मिलने की, और वो रुबरु हो जाये ।

काश ! मेरी मोहब्बत की, ऐसी तासीर हो जाये ।।

न शिकवा ना शिकायत हो कोई भी खुदा से ।

काश!  ऐसा हर कोई खुश नसीब हो जाये…

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Added by बसंत नेमा on July 26, 2013 at 2:00pm — 9 Comments

दोहे ( प्रथम प्रयास )

दोहे ( प्रथम प्रयास ) 

दर दर भटके पूजता, तू महंत फकीर ।

चरण छुये माँ-बाप के, बनती है तकदीर ॥ 1 ॥

प्यासे को पानी मिले, भूखा जाये जीम ।

ऐसे घर मे लक्ष्मी, कृपा करे आसीम ॥ 2 ॥

जर जोरु दोनो मिले, बिछ्डे पुन मिल जाँए ।

जग छोड माँ-बाप गये, फिर वापस न आँए ॥ 3॥

छ्प्पन भोग तेरे धरे, देव प्रसन्न न होए ।

जब घर पे माता पिता, भूखे बैठे होए ॥4॥

बाल रुप धर तीन देव, करते अमृतपान…

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Added by बसंत नेमा on July 24, 2013 at 11:30am — 19 Comments

!! वो कौन था !!

!! वो कौन था !!

 

आये तो कई लोग, ज़िन्दगी मे मेरी मगर ।

वो कौन था जो सीधे, दिल मे समा गया ।।…

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Added by बसंत नेमा on July 1, 2013 at 10:00am — 20 Comments

!! मेरी लाडो !! एक प्रयास शक्ति को जगाने का

!! मेरी लाडो !!

 “ मेरी लाडो ” समर्पित है उन तमाम बहन बेटियो को जो किसी न किसी हादसो के कारण से अपने वजूद अपने अस्तिव को भुला चुकी है या फिर हार मानके अपनी किस्मत को दोष दे रही है । ये एक प्रयास है…

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Added by बसंत नेमा on June 25, 2013 at 2:30pm — 18 Comments

!! भजन !!

!! भजन !!

जब चारो ओर अन्धेरा हो ।…

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Added by बसंत नेमा on June 14, 2013 at 1:16pm — 10 Comments

!! ये यादे !!

!! ये यादे !!  

कभी होठो पे हँसी लाती है ये यादे ।

कभी आंखो मे नमी लाती है ये यादे ।।

कभी माशूक कभी मासूम सी होती है ये यादे ।…

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Added by बसंत नेमा on June 12, 2013 at 1:00pm — 9 Comments

॥ मेरा साथ निभाना तुम ॥ (श्रंगार रस का पहला प्रयास )

 

॥ मेरा साथ निभाना तुम ॥

मै बसंत हूँ , मेरी बहार बन जाना तुम ।

मै सूरज बनूँ तुम्हारा, मेरी किरण बन जाना तुम । …

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Added by बसंत नेमा on May 6, 2013 at 12:30pm — 9 Comments

एक अजन्मा दर्द

॥ एक अजन्मा दर्द ॥

माँ मुझको भी जीवन दे दे, मै भी जीना चाहती हू ।

सखी सहेली वीरा के संग, मै…

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Added by बसंत नेमा on April 29, 2013 at 12:00pm — 9 Comments

मै बरगद का पेड

|| मै बरगद का पेड ||

मै बरगद का पेड सयाना, चिरस्थिर खडा था आँगन मे ।

कितने मौसम आते जाते, देखे है मैने जीवन मे ।

सदीया बीती नदिया रीति, वो गाँवो का शहर बन जाना  ।

अब मै डरा सहमा सा खडा हुआ हू, इन  कंक्रीटो के वन मे

वो बडॆ प्यार से अम्मा बाबा का, मुझे धरा मे रोपना ।

वो खुद के बच्चो जैसा मेरा, लाड प्यार से पाल पोसना ।

वो पकड के मेरी बाहो को, मुन्ना मुनिया का झुला झुलना

वो चढ के मेरे कंधो पर, कटी…

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Added by बसंत नेमा on April 25, 2013 at 12:30pm — 11 Comments

गरमी आ गई भाईया

 गरमी आ गई भाईया

सूरज आंखे तरेर रहा ले, हाथो मे अग्नि बाण ।

बिना कवच जो निकले बाहर, ये…

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Added by बसंत नेमा on April 17, 2013 at 2:00pm — 6 Comments

जिन्दगी का जबाब

जिन्दगी का जबाब

कल राह मे जिन्दगी से मुलाकात हो गयी ।

पूछा जो एक सवाल* तो जिन्दगी नाराज हो गयी।   

बोली देता है मुझको दोष, बता तुने क्या अच्छा किया है…

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Added by बसंत नेमा on April 15, 2013 at 10:30am — 8 Comments

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