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यह प्यार का समंदर क्यों आंखो मे समाया है
एक ठंडी सी तपिस में क्यों दिल को डुबाया है
मत देखो इस तरह...कि एक तूफ़ान सा उठता है
मन पल में सहमता है क्षण भर में मचलता है
तुम आओ तो सही हम दीवानों की महफ़िल में
इस अंजुमन की रौ में कोई पतंगा जलता है

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Comment by Lata R.Ojha on December 22, 2010 at 8:23pm
kaise hain Bade bhai aur hain kahaan ?
Comment by Rash Bihari Ravi on December 22, 2010 at 7:25pm
khubsurat lajabab
Comment by Dr.Brijesh Kumar Tripathi on December 22, 2010 at 7:22pm
Thank you Lata bahan
Comment by Lata R.Ojha on December 21, 2010 at 2:23pm

umadte hue bhaavon ke samandar ko shabdon mein kitne jatan se sameta hai aapne..

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