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सिर्फ तुम्हारे लिए

तेरे अधरों की मुस्कान,

भरती मेरे तन में प्राण.

जीवन की ऊर्जा हो तुम,

साँसों की सरगम की तान.

मैं सीप तुम मेरा मोती ,

मैं दीपक तुम मेरी ज्योति.

कभी पूर्ण न मैं हो पाता ,

संग मेरे जो तुम न होती.

किन्तु दुख है कि मैं तुमको,

कभी नहीं खुश रख पाया .

तुमने मुझसे पाया घाटा ,

मैंने केवल लाभ कमाया.

बस खुदा से यही प्रार्थना,

खुश रक्खे तुझको हरदम.

मेरे प्राणों की कीमत भी,

तेरी खुशी के लिए है कम.

(सर्वथा मौलिक एवं अप्रकाशित- प्रदीप बहुगुणा ‘दर्पण’)

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Comment by राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' on July 18, 2013 at 2:39pm

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति प्रदीप जी ........उम्दा पंक्तियां का संयोजन ......

मैं सीप तुम मेरा मोती ,

मैं दीपक तुम मेरी ज्योति.

कभी पूर्ण न मैं हो पाता ,

संग मेरे जो तुम न होती.

किन्तु दुख है कि मैं तुमको,

कभी नहीं खुश रख पाया .

तुमने मुझसे पाया घाटा ,

मैंने केवल लाभ कमाया.

Comment by Pradeep Bahuguna Darpan on July 2, 2013 at 12:44pm

विजय निकोरे जी...  बहुत बहुत आभार .... 

Comment by Pradeep Bahuguna Darpan on July 2, 2013 at 12:42pm

डा.प्राची जी .... मन के भावों को समझकर सटीक विश्लेषण और उत्साहवर्द्धन के लिए बहुत बहुत आभार .... आपकी बात अक्षरश सही है .

Comment by vijay nikore on July 2, 2013 at 7:35am

आदरणीय प्रदीप जी:

 

// मेरे प्राणों की कीमत भी,

तेरी खुशी के लिए है कम.//

अति मार्मिक भावाभिव्यक्ति के लिए साधुवाद।

सादर,

विजय निकोर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 2, 2013 at 7:26am

निश्छल निःस्वार्थ प्रेम..जब परिस्थितियों में उलझ सा जाए...... और प्रियतम ही उसे समझ न सके, तो ह्रदय अपने अन्तः भावों को जैसे ज़ाहिर कर देना चाहता हो शब्दों के दर्पण में....

ऐसी ही unmanipulated अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई.

Comment by Pradeep Bahuguna Darpan on July 1, 2013 at 9:57pm
Aarti Sharma ji... Dhanywad ...
Comment by Pradeep Bahuguna Darpan on July 1, 2013 at 9:56pm
मीना पाठक जी और अरुण जी ... आपका बहुत बहुत शुक्रिया.......
Comment by Meena Pathak on July 1, 2013 at 3:11pm

किन्तु दुख है कि मैं तुमको,

कभी नहीं खुश रख पाया .

तुमने मुझसे पाया घाटा ,

मैंने केवल लाभ कमाया..... बहुत उम्दा .. हार्दिक बधाई 

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 1, 2013 at 1:15pm

किन्तु दुख है कि मैं तुमको,

कभी नहीं खुश रख पाया .

तुमने मुझसे पाया घाटा ,

मैंने केवल लाभ कमाया. ... भाई जी इन पंक्तियों ने दिल को छू लिया, हार्दिक बधाई

Comment by Aarti Sharma on July 1, 2013 at 1:06pm

बहुत उम्दा प्रदीप जी..बधाई स्वीकारें 

कृपया ध्यान दे...

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