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मेरे गीतों में मीरा दीवानी सही

ओ.बी.ओ. के पावन मंच और गुरुजनों को सादर प्रणाम करता हूँ. समयाभाव के चलते  नियमित रूप से मंच से जुड नही पा रहा हूँ इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ  और आप सबके बीच कुछ मुक्तक निवेदित कर रहा हूँ. कृपया मार्गदर्शन करें .सादर

क्यूँ कभी प्रेम की ये निशानी लगे.

अश्रुपूरित कभी  ये जवानी  लगे.

ओस बन खो गये हैं हवा में कहीं,

बूँद पानी  की ये  जिंदगानी  लगे.

प्रेम  की  बागवानी  पुरानी  सही.

कृष्ण-राधा की प्यारी कहानी सही.

तुम लिखो फूल को शूल चाहे अनल,

मेरे गीतों  में  मीरा  दीवानी  सही .

शब्द से खेलना हमको आता नहीं.

तौल कर बोलना हमको आता नहीं.

जिंदगी   प्रेम  का गीत  है साथियों,

द्वैष विष घोलना हमको आता नहीं.

गीत कविता गजल गुनगुनाता चलूँ.

आँख से  आँसुओं  को  चुराता  चलूँ.

प्यार की धुन बनो तो गजल मैं कहूँ,

साथ जन्मों जनम तक निभाता चलूँ.

*मौलिक एवं अप्रकाशित*

    शैलेंद्र सिंह 'मृदु'

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Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 5, 2013 at 11:44pm

आदरणीया  coontee muker मैम  सराहना एवं  उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत  आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 5, 2013 at 11:42pm

आदरणीय Dr Lalit Kumar Singh जी सराहना एवं  उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत  आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 5, 2013 at 11:40pm

आदरणीय Laxman Prasad Ladiwala सर  उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत  आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 5, 2013 at 11:40pm

आदरणीय बसंत नेमा जी  उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत  आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 5, 2013 at 11:38pm

आदरणीय Jitendra Pastariya  जी प्रतिक्रिया व  उत्साहवर्धन हेतु कोटिशः आभार

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 5, 2013 at 11:37pm

आदरणीय Sumit Naithani जी उत्साहवर्धन हेतु कोटिशः आभार

Comment by coontee mukerji on July 5, 2013 at 7:14pm

प्रेम  की  बागवानी  पुरानी  सही.

कृष्ण-राधा की प्यारी कहानी सही.

तुम लिखो फूल को शूल चाहे अनल,

मेरे गीतों  में  मीरा  दीवानी  सही.......बहुत सरस और सुंदर प्रस्तुति.

Comment by Dr Lalit Kumar Singh on July 5, 2013 at 5:52pm

वाह वाह वाह , मज़ा आ गया भाई साहेब 

मज़ा आ गया 
 सादर 
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 5, 2013 at 4:30pm

चारो मुक्तक सुन्दर बन पड़े है आपके श्री शैल्लेन्द्र सिंह मृदु जी | बहुत बहुत बधाई स्वीकारे 

Comment by बसंत नेमा on July 5, 2013 at 4:25pm

बहुत सुन्दर रचना ...बधाई शुभकामनाये 

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