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ग़ज़ल : ग़ज़ल कहनी पड़ेगी झुग्गियों पर कारखानों पर

बहर : १२२२ १२२२ १२२२ १२२२

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ग़ज़ल कहनी पड़ेगी झुग्गियों पर कारखानों पर

ये फन वरना मिलेगा जल्द रद्दी की दुकानों पर

 

कलन कहता रहा संभावना सब पर बराबर है

हमेशा बिजलियाँ गिरती रहीं कच्चे मकानों पर

 

लड़ाकू जेट उड़ाये खूब हमने रातदिन लेकिन

कभी पहरा लगा पाये न गिद्धों की उड़ानों पर

 

सभी का हक है जंगल पे कहा खरगोश ने जबसे

तभी से शेर, चीते, लोमड़ी बैठे मचानों पर

 

कहा सबने बनेगा एक दिन ये देश नंबर वन

नतीजा देखकर मुझको हँसी आई रुझानों पर

-----------

(मौलिक एवम् अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Arun Sri on July 18, 2013 at 2:12pm

क्या बात है ! लगता है आपने बम बनाने का कारखाना लगा रखा है ! क्या धमाके किए हैं सर जी ! मज़ा आ गया ! वाह !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 18, 2013 at 1:56pm

वीनस भाई,  कैल्कुलस को हिन्दी में कलन भी कहते हैं जिसमें इण्टिग्रेशन के दौरान ’लिमिट टेण्ड्स टू इन्फ़िनिटी..’ का बड़ा महत्त्व है.

आदरणीय धर्मेन्द्र जी का इशारा उसी कैल्कुलस यानि कलन की ओर है जिसके अनुसार इण्टिग्रेशन के क्रम में अनुभूत संभावनाएँ इन्फ़िनिटी यानि अनन्त होती हैं. लेकिन इस गणित का हकीक़त यानि हल कुछ और ही कहता है जो उस शेर के सानी से स्पष्ट है.

शुभम्

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 17, 2013 at 6:57pm

शुक्रिया विजय मिश्र जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 17, 2013 at 6:57pm

बहुत बहुत धन्यवाद  Dr.Prachi Singh जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 17, 2013 at 6:57pm

बहुत बहुत धन्यवाद डॉ. सूर्या बाली "सूरज" जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 17, 2013 at 6:56pm

बहुत बहुत शुक्रिया  shashi purwar जी

Comment by विजय मिश्र on July 15, 2013 at 4:46pm
"नतीजा देखकर मुझको हँसी आई रुझानों पर " -- क्या खूब कही ,जनाब !

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 15, 2013 at 10:02am

कलन कहता रहा संभावना सब पर बराबर है

हमेशा बिजलियाँ गिरती रहीं कच्चे मकानों पर

 

सभी का हक है जंगल पे कहा खरगोश ने जबसे

तभी से शेर, चीते, लोमड़ी बैठे मचानों पर

वाह! बहुत सुन्दर गज़ल आ० धर्मेन्द्र जी .. ये दो शेर तो खास बहुत पसंद आये 

बहुत बहुत बधाई 

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on July 15, 2013 at 1:06am

बहुत उम्दा मतला हुआ है धर्मेंद्र जी ....दाद कुबूल हो 

Comment by shashi purwar on July 14, 2013 at 10:48pm

waah bahut khoob dharmendra ji

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