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ग़ज़ल : ग़ज़ल कहनी पड़ेगी झुग्गियों पर कारखानों पर

बहर : १२२२ १२२२ १२२२ १२२२

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ग़ज़ल कहनी पड़ेगी झुग्गियों पर कारखानों पर

ये फन वरना मिलेगा जल्द रद्दी की दुकानों पर

 

कलन कहता रहा संभावना सब पर बराबर है

हमेशा बिजलियाँ गिरती रहीं कच्चे मकानों पर

 

लड़ाकू जेट उड़ाये खूब हमने रातदिन लेकिन

कभी पहरा लगा पाये न गिद्धों की उड़ानों पर

 

सभी का हक है जंगल पे कहा खरगोश ने जबसे

तभी से शेर, चीते, लोमड़ी बैठे मचानों पर

 

कहा सबने बनेगा एक दिन ये देश नंबर वन

नतीजा देखकर मुझको हँसी आई रुझानों पर

-----------

(मौलिक एवम् अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 14, 2013 at 10:41pm

बहुत बहुत शुक्रिया arun kumar nigam जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 14, 2013 at 10:40pm

बहुत बहुत शुक्रिया Neeraj Mishra जी

Comment by वीनस केसरी on July 14, 2013 at 10:40pm

ओह ... तो ये आकलन वाला कलन है :)))))))))

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 14, 2013 at 10:40pm

आभारी हूँ Saurabh Pandey जी, स्नेह बना रहे

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 14, 2013 at 10:39pm

बहुत बहुत शुक्रिया वीनस केसरी जी। आप की दाद आई जैसे खुदा की इमदाद आई

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 14, 2013 at 10:36pm

वीनस केसरी जी, कलन यानि हिसाब-किताब या गणना या अंकगणित इत्यादि


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on July 14, 2013 at 9:16pm

ये फन वरना मिलेगा जल्द रद्दी की दुकानों पर...................

अय हय हय आदरणीय धर्मेंद्र कुमार सिंह जी.....इस पंक्ति ने तो बस लूट ही लिया............

Comment by वीनस केसरी on July 14, 2013 at 8:24pm

धर्मेन्द्र भई मैं कलन का अर्थ नहीं जानता :((((((( 

Comment by Neeraj Nishchal on July 14, 2013 at 8:10pm

कलन कहता रहा संभावना सब पर बराबर है,

हमेशा बिजलियाँ गिरती रहीं कच्चे मकानों पर |

ulimate stanza so nice respected Dharmendra kumaar ji


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 14, 2013 at 2:37am

सभी का हक है जंगल पे कहा खरगोश ने जबसे

तभी से शेर, चीते, लोमड़ी बैठे मचानों पर

 

कहा सबने बनेगा एक दिन ये देश नंबर वन

नतीजा देखकर मुझको हँसी आई रुझानों पर

आदरणीय धर्मेन्द्र जी, आपके उपरोक्त अश’आर ने देर तक बाँधे रखा.  इनके होने पर आपको विशेष बधाइयाँ 

वैसे पूरी ग़ज़ल खुसूसी तेवर के कारण ताज़ा है. 

कृपया ध्यान दे...

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