For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

( २१२२ २१२२ २१२ )

क्या हुआ कोशिश अगर ज़ाया गई
दोस्ती हमको निभानी आ गई |

बाँधकर रखता भला कैसे उसे
आज पिंजर तोड़कर चिड़िया गई |

चूड़ियों की खनखनाहट थी सुबह
शाम को लौटी तो घर तन्हा गई |

लहलहाते खेत थे कल तक यहाँ
आज माटी गाँव की पथरा गई |

कैस तुमको फ़ख्र हो माशूक पर
पत्थरों के बीच फिर लैला गई |

आज फिर आँखों में सूखा है 'सलिल'
जिंदगी फिर से तुम्हें झुठला गई |

-- आशीष नैथानी 'सलिल'
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 753

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 13, 2013 at 7:05pm

वीनस भाई जी, हौसला-अफजाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया |

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 13, 2013 at 7:04pm

आदरणीय सौरभ सर, आपके ये शब्द मुझे और अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करेंगे |
बहुत-बहुत शुक्रिया !    :)))))

Comment by वीनस केसरी on August 12, 2013 at 12:42am
बहुत खूब आशीष जी ...

बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है /... मतला और मक्ता बहुत कामयाब हुए हैं ...

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 11, 2013 at 10:24pm

भाई आशीष सलिलजी,  दिल से दुआ कर रहा हूँ आपका ये मेयार और अंदाज़ बना रहे. मतले से लेकर मक्ते तक ग़ज़ल बस वाह वाह है. किस एक शेर की बात करूँ ? ग़ज़ल में उस्तादों वाली बात है साहब.ऐसे ही कहें और खूब कहें

कमाल कमाल कमाल

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 6, 2013 at 7:35pm

बहुत बहुत शुक्रिया भाई जीत जी,  भाई श्याम नारायण जी  !!!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 6, 2013 at 7:33pm

आदरणीय योगराज सर,  आपने गलती के साथ समाधान भी बता दिया, इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया !  :) :)
मैं मतले को आपके दिए गये सुझाव के अनुसार बदल रहा हूँ, अब शेर अच्छा भी लग रहा है |
एक और तरह के दोष का आज पता चला, आगे से इसका ध्यान रखूँगा !

पुनः हार्दिक धन्यवाद |  आदरणीय अभिनव अरुण जी का भी आभार  !

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 6, 2013 at 7:27pm

आदरणीया सरिता जी, आदरणीया गीतिका जी,
भाई सौरभ श्रीवास्तव जी और भाई शिज्जू जी..... आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया !!! 

Comment by Shyam Narain Verma on August 6, 2013 at 5:08pm
बहुत ही सुन्दर! हार्दिक बधाई आपको!
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 6, 2013 at 5:06pm

लहलहाते खेत थे कल तक यहाँ 
आज माटी गाँव की पथरा गयी |............वाह ! यह शेर बहुत सुंदर है 

शानदार  गजल  पर , तहे दिल  से दाद कुबूल कीजिये आदरणीय आशीष जी 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on August 6, 2013 at 4:32pm

भाई आशीष जी, आपके मतले के ऊला में एक भारी ऐब है (जिसकी तरफ आदरणीय अभिनव अरुण भाई ने इशारा भी किया है), ज़रा मतला देखें;

//क्या हुआ जो कोशिशें ज़ाया गयी//

"कोशिशें ज़ाया गयी" गलत है, "कोशिशें = बहुवचन" और "गयी = एकवचन", असूलन तो यहाँ "कोशिशें ज़ाया गईं" होना चाहिए था. लेकिन "गईं" लेने से पूरी रदीफ़ गलत हो जाएगी. मेरा सुझाव है कि इस मिसरे को यूं कर लिया जाए:

.

"क्या हुआ कोशिश अगर जाया गई"

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Monday
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service