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ग़ज़ल - इतनी आसाँ ज़िंदगी होगी नहीं !

(मात्रिक विन्यास -- २१२२ २१२२ २१२ )


इतनी आसाँ ज़िंदगी होगी नहीं
मुश्किलों से दोस्ती होगी नहीं |

दर्द से कागज़ पे करना रौशनी
हर किसी से शाइरी होगी नहीं |

रुक न पाया सिलसिला जो बाँध का
कल के दिन भागीरथी होगी नहीं |

इस तरह कुचला गया जो हर गुलाब
फिर किसी घर में कली होगी नहीं |

मुद्दतों के बाद याद आया कोई
मेरे घर अब तीरगी होगी नहीं |


- आशीष नैथानी 'सलिल'
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on September 23, 2013 at 10:02am

तहे दिल से शुक्रिया आदरणीय Saurabh Pandey जी !!!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on September 23, 2013 at 10:01am

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय vijay nikore जी !

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on September 23, 2013 at 10:01am

तहे दिल से शुक्रिया आदरणीय Dr.Prachi Singh  जी !!!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 1, 2013 at 12:30am

एक अच्छी ग़ज़ल हुई है. बहुत बहुत बधाई स्वीकारें

शुभ-शुभ

Comment by vijay nikore on August 30, 2013 at 11:43am

सुन्दर गज़ल के लिए बधाई।

 

 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 27, 2013 at 9:10pm

इस तरह कुचला गया जो हर गुलाब 
फिर किसी घर में कली होगी नहीं |............वाह !

पूरी गज़ल सुन्दर हुई है , इस शेर नें जैसे रोक ही लिया. बहुत बहुत बधाई 

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 26, 2013 at 8:38pm

आपकी टिप्पणी पाकर दिल प्रसन्न हुआ भाई राम शिरोमणि जी....
बहुत बहुत शुक्रिया !!!

Comment by ram shiromani pathak on August 26, 2013 at 8:33pm

इस तरह कुचला गया जो हर गुलाब 
फिर किसी घर में कली होगी नहीं |

मुद्दतों के बाद याद आया कोई//
मेरे घर अब तीरगी होगी नहीं |वाह भाई ज़ोरदार

 बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें। सादर

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 26, 2013 at 8:20pm

जर्रा नवाजी के लिए तहेदिल से शुक्रिया भाई Kewal Prasad जी !!!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 26, 2013 at 8:19pm

बहुत बहुत शुक्रिया Sonam Saini जी !!!

बहुत बहुत शुक्रिया विजय मिश्र जी !!!

बहुत बहुत शुक्रिया shubhra sharma जी !!!

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