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ठीक है फैसला ,
जीवन और मृत्यु सा था ।
चुनाव भी तो तुम्हारा अपना था।
फैसला तुम्हारा खुद का था,  
तो, उदासी क्योँ ?
खुद का लिया फैसला, 
कभी भी खुद को तो उदास नही करता ।
अगर बगैर किसी दबाव या मज़बूरी से लिया जाय ।
हां, दूसरे उदास , परेशान हो सकते है ,
तुम्हारे फैसले से ।
फिर क्यों उदास हो ?
क्या तुम खुद को नही जानते ?
नही पहचानते ?
हां,ये हो भी सकता है,या
ये  ही होगा निश्चित !
क्यों कि ,
हम अपनी पूरी ऊर्जा,
पूरी शक्ति, पूरी समझ,पूरा समय
दूसरों को जानने मे लगाये हुये हैं ।
खुद को कभी जान ही नही पाये ।
खुद से नितांत अनजान ! 
क्या फैसला करेगा !!
खुद के लिये !!!
और करेगा भी तो कितना सही होगा
कौन जाने ?    

*************
मौलिक एवँ अप्रकाशित
 

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 26, 2013 at 8:18pm

सौरभ भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका अभार ! आपकी सलाह  ध्यान रखूंगा , सलाह के लिये धन्यवाद भाई जी !! 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 26, 2013 at 8:02pm

बहुत साझा करती इस कविता के लिए हृदय से बधाई आदरणीय गिरिराजजी. 

आपकी रचनाओं की वैचारिकता प्रभावित करती है. ऐसी कविताओं में शाब्दिकता को हावी न होने दें. शब्दों का प्रयोग गठन के अनुरूप हो.

आपकी रचनाओं का इंतज़ार रहेगा.

शुभ-शुभ

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 20, 2013 at 3:08pm

परम आदरणीय विजय भाई , रचना स्वीकार्ने के लिये आपका दिली शुक्रिया !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 20, 2013 at 3:05pm

राम शिरोमणी भाई जी बहुत बहुत शुक्रिया !!

Comment by ram shiromani pathak on August 20, 2013 at 2:20pm

बहुत ही  सुन्दर अभिव्यक्ति !! //हार्दिक बधाई आपको 

Comment by vijay nikore on August 20, 2013 at 1:38pm

//

//फैसला तुम्हारा खुद का था,  तो, उदासी क्योँ ?//   .... अति सुन्दर भाव !

 

//हम अपनी पूरी ऊर्जा,

पूरी शक्ति, पूरी समझ,पूरा समय

दूसरों को जानने मे लगाये हुये हैं ।

खुद को कभी जान ही नही पाये ।//

 

बहुत सच कहा है आपने।

अभिव्यक्ति के लिए आपको बधाई।

सादर,

विजय निकोर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 20, 2013 at 11:27am

अन्नपूर्णा जी , हौसला अफज़ाई के लिये शुक्रिया !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 20, 2013 at 11:26am

गीतिका जी , बहुत आभार आपका !!

Comment by वेदिका on August 19, 2013 at 11:20pm

बढ़िया अभिव्यक्ति !!

बधाई स्वीकारिये आदरणीय गिरिराज जी!

Comment by annapurna bajpai on August 19, 2013 at 11:11pm
आ ० भण्डारी जी अति सुंदर रचना पर क्या कहूँ निशब्द हूँ । शुभकामनायें ।

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