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ये..इश्क ही तो है..

चमकती चाँदनी के काजल सी रात..


सर्द हवा और तारों का साथ.. 

लहराती ज़ुल्फ़ें,बेचैन दिल.. 

तेरा ख़त और प्यार की बात.. 


जागी आँखें सोए से हम.. 

मुस्काते लब,पलकें नम.. 

उड़ता आँचल,ठहरा पल…

काबू ना आएँ ये जज़्बात.. 


बातें तेरी प्यार भरी.. 

करने लगी हैं,जादूगरी.. 

भाने लगी है हर हलचल.. 

तुमने समझ ली मेरे दिल की बात.. 


ये..इश्क ही तो है.. 

Views: 432

Comment

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Comment by Lata R.Ojha on December 27, 2010 at 1:21pm
आभार अभय जी :) 
Comment by Abhay Kant Jha Deepraaj on December 27, 2010 at 2:20am
Lata Jee, Thanks for impressive expression.bhay......
Comment by Lata R.Ojha on December 23, 2010 at 4:00pm
भास्कर जी और नवीन जी आप दोनो का बहुत बहुत धन्यवाद :) 
Comment by Bhasker Agrawal on December 23, 2010 at 6:16am

 

चमकती चाँदनी के काजल सी रात...
वाह!! शुरुआत में ही कमाल कर दिया ...बहुत खूब
Comment by Lata R.Ojha on December 22, 2010 at 11:29pm
Dhanyavaad Manoj ji :)
Comment by Lata R.Ojha on December 22, 2010 at 10:01pm
तारीफ के लिए शुक्रिया गणेश जी :) 

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 22, 2010 at 9:08pm
बातें तेरी प्यार भरी..
करने लगी हैं,जादूगरी..
भाने लगी है हर हलचल..
तुमने समझ ली मेरे दिल की बात..
ये..इश्क ही तो है.....

हा हा हा , सही कहा आपने, यह प्यार ही है, बेहतरीन कविता, शानदार अभिव्यक्ति हेतु बधाई |
उम्मीद करते है कि आगे भी आपकी बेहतरीन रचनायें और अन्य रचनाओं पर आपकी बहुमूल्य टिप्पणिया प्राप्त होती रहेगी |
Comment by Lata R.Ojha on December 22, 2010 at 8:18pm
bahut bahut dhayavaad Giri ji :)
Comment by Rash Bihari Ravi on December 22, 2010 at 6:39pm
khubsurat lajabab

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