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बिखेरे हँसी

दोस्तो के संग-संग
मै और तुम

बिखेरे गंध
फूलो के संग-संग
मै और तुम

बिखेरे सुर
कुहू के संग-संग
मै और तुम

बिखेरे शब्द
कलम के संग-संग
मै और तुम

मौलिक अप्रकाशित रचना
नयना(आरती कानिटकर
०१/०९/२०१३

Views: 545

Comment

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Comment by नयना(आरती)कानिटकर on September 3, 2013 at 1:09pm
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 2, 2013 at 11:48pm

सुंदर रचना अभिव्यक्ति हेतु बधाई आदरणीय नयना जी

Comment by annapurna bajpai on September 2, 2013 at 11:18pm

सुंदर प्यारी सी रचना , बधाई नयना जी ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 2, 2013 at 3:54pm

दो इंसानों को एकमेव  करती हाइकु विधा में सुन्दर प्रस्तुति बधाई आपको आरती जी 

Comment by aman kumar on September 2, 2013 at 11:52am

अति सुन्दर रचना 

Comment by नयना(आरती)कानिटकर on September 1, 2013 at 3:53pm

गिरिराज भंडारी जी  आपका बहुत बहुत शुक्रिया , हौसला अफज़ाई के लिये !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 1, 2013 at 3:45pm

आरती जी , सुन्दर रचना ,बधाई !!

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