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२ १ २ २     २ १  २ १    १ २ १ २

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छोडो अपनी ढाई चाल बहुत हुआ

खून में आया उबाल बहुत हुआ

 

आम जनता की आवाज दबे नहीं

देश में लाये भूचाल बहुत हुआ  

 

खींच लेगा आज वक़्त ये कुर्सियां

कर चुके जितना धमाल बहुत हुआ

 

अब सियासी हंडिया ये उतार दो    

पक चुकी जितनी  ये दाल बहुत हुआ

 

दोगुला अब तो   चलन ये   चले नहीं

बेहयाई का कमाल बहुत हुआ 

 

क़र्ज़ में अब  देश खूब   डुबा चुके

आज रूपये का ये हाल बहुत हुआ

देश की जनता है  जाग उठी  अभी 

नोंच लेगी  बाल खाल बहुत हुआ

********************************************

मौलिक एवं अप्रकाशित 

 

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 7, 2013 at 5:17pm

प्रिय राम शिरोमणि पाठक जी आपको ग़ज़ल पसंद आई  इस उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 7, 2013 at 5:16pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी इस उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक आभार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 7, 2013 at 5:16pm

 Nayana(Arati) Kanitkar   जी दिल से शुक्रिया. 

Comment by ram shiromani pathak on September 7, 2013 at 4:01pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी,सुन्दर गजल हुई है //हार्दिक बधाई आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 7, 2013 at 3:52pm
आदरणीया राजेश कुमारी जी ,देश की वर्तमान स्थिति पर बहुत बढ़िया गज़ल कही !!बधाई !!
Comment by नयना(आरती)कानिटकर on September 7, 2013 at 12:48pm

सच में, बहुत हुआ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 7, 2013 at 9:43am

आदरणीया मीना पाठक जी  इस प्रोत्साहन हेतु  दिल से आभारी हूँ |

Comment by Meena Pathak on September 7, 2013 at 9:34am

बहुत सुन्दर रचना ....... सच में, बहुत हुआ

सुन्दर रचना हेतु हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 7, 2013 at 8:47am

आदरणीया अन्नापूर्णा जी आपके अनुमोदन  से प्प्रस्तुति  धन्य हुई दिल से आभार आपका |

Comment by annapurna bajpai on September 6, 2013 at 11:48pm

आ0 राजेश कुमारी जी सच मे-  अब बहुत हुआ !!!!!!!!  अब तो जागना होगा

                                                                   गिरती साख थामना होगा । 

बढ़िया , बधाई आपको । 

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