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कुछ अधखुले बीज....

कुलबुलाते कुछ अधखुले बीज

मेरे बरामदे के कोने में पड़े हैं

शायद माँ ने जब फटकारे

तो गिर गए होंगे

बारिश के होने से कुछ पानी और

नमी भी मिल गयी उन्हें

सफाई करते ध्यान भी नहीं दिया

बड़ी लापरवाह है कामवाली भी

दो दिन हुए हैं और बीजों ने

हाथ पैर फ़ैलाने शुरू कर दिए

हाँ ठीक भी तो है

मुफ्त में मिली सुविधा से

अवांछित तत्व फलते-फूलते ही हैं

पर अब जब वो यूँही रहे तो

बरामदे में अपनी जड़े जमा लेंगे

फिर ज़मीन में पड़ेंगी दरारे भी

मेरी माँ का खूबसूरत सा

बरामदा चटखने लगेगा

माँ को दुःख होगा...

क्यों न मैं ही इसे हटा दूँ अभी

इसकी बढ़ती टांगों से पहले

कल को ये घर में बदसूरती लाये

क्यों न मैं ही इसका वजूद मिटा दूँ

या इसे एक नयी ज़मी दूँ

जहाँ ये पनप सके.....जन्म ले सके

अभी ये नापसंद है माँ को

तब ये माँ का दुलार पा सके

एक हिस्सा बन जाये शायद

माँ के इस बरामदे का

खिली पत्तियाँ और रंगीन फूलों से

तब माँ को ख़ुशी होगी

और मुझे भी....

(मौलिक एव अप्रकाशित)

.......प्रियंका

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Comment

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Comment by Priyanka singh on September 15, 2013 at 9:18pm

आदरणीय....जितेन्द्र जी पसंदगी का बहुत बहुत शुक्रिया आपका .....

Comment by Priyanka singh on September 15, 2013 at 9:16pm

गीतिका जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका .....

Comment by Priyanka singh on September 15, 2013 at 9:14pm

आदरणीय...आशुतोष सर बहुत बहुत शुक्रिया आपका .....

Comment by बृजेश नीरज on September 15, 2013 at 8:37pm

बहुत अच्छा प्रयास है. आपको हार्दिक बधाई.

शिल्प थोडा और समय मांग रहा है. 

सादर!

Comment by Abhinav Arun on September 15, 2013 at 1:14pm

सुन्दर सच्चे भाव ..सृजन की काव्य वल्लरी की प्रस्तुति के लिए बधाई और शुभकामनायें प्रियंका जी !

Comment by Manav Mehta on September 15, 2013 at 11:52am
वाह... बहुत खूब... बेहद ही उम्दा।
Comment by अरुन 'अनन्त' on September 15, 2013 at 11:40am

बहुत ही उत्तम विचार हैं आदरणीया प्रियंका जी अब ये कामवाली की लापरवाही कहें या ईश्वर की मर्जी जब वे हाँथ पैर फैला ही रहे हैं तो क्यूँ न हम उन्हें बड़ा भी होने दें. हार्दिक बधाई स्वीकारें इस सुन्दर प्रस्तुति पर.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 15, 2013 at 10:16am

अच्छा वैचारिक मंथन हुआ है : इसके लिए बधाई आदरणीया प्रियंका जी

Comment by annapurna bajpai on September 14, 2013 at 11:04pm

उत्तम विचारों से ओतप्रोत रचना , बधाई आपको ।

Comment by vijay nikore on September 14, 2013 at 7:17pm

आदरणीया प्रियंका जी:

 

बहुत ही अनोखी सोच है, और रचना में विचारधारा को अच्छा सकारात्मक मोड़ दिया है।

आपको हार्दिक बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

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