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कुण्डलिया [ हिंदी दिवस]

शान है मातृभूमि की, देश का स्वाभिमान ,
हिंदी बिंदी मात की, यह मेरा अभिमान //
यह मेरा अभिमान, अधिकार है यह सबका ;
दो इसको विस्तार, है कर्तव्य जन जन का ;
हिंदी दिन को आज, देना यह सम्मान है
अपनाओ सब मीत ,इसमें इसकी शान है //

................मौलिक व अप्रकाशित ..............

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Comment by Sarita Bhatia on September 17, 2013 at 6:03pm

शुक्रिया अरुण मैंने कुछ ठीक किया यह शायद बेहतर है 

अपनायें सभी जन इसमें इसकी शान है 

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 17, 2013 at 5:06pm

आदरणीया सरिता जी बेहद सुन्दर कुण्डलिया छंद रचा है आपने, सत्य कहा आपने जिस तरह से हिंदी धीरे धीरे लुप्त हो रही यह कदम उठाना अत्यंत आवश्यक हो गया, अंतिम पद में प्रवाह बाधित लग रहा कृपया एक बार आप भी देख लें. इस कुण्डलिया छंद हेतु बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

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