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रूप घनाक्षरी (32 वर्ण अन्त में लघु)

दंगा करार्इये खूब, जीना सिखार्इये खूब, हर हाल में जीना है, कांटे बिछार्इये खूब।
अवसर भुनार्इये, जाति-धर्म लड़ार्इये, सौहार्द-भार्इचारा को, जिंदा जलार्इये खूब।।
गाते रहे तिमिर में, झींगुर श्वांस लय में, सर्प-बिच्छू देव सम, बाहें बढ़ार्इये खूब।
नारी दुर्गा काली सम, जया  शक्ति यशो गुन, महिषा-भस्मासुर सा, नाच दिखार्इये खूब।।

के0पी0सत्यम / मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 3, 2013 at 1:40pm

आप घनाक्षरी कैसे लिखते हैं ?

इसके मूलभूत नियमों को देख जाइये, आपके पास सामग्री है.  वर्ण संख्या को नियत करने के अलावे शब्द-संयोजन पर भी बहुत कुछ है अनुसरण करने के लि.

शुभेच्छाएँ

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 3, 2013 at 7:21am

आदरणीय सुरेन्द्र भ्रमर भार्इ जी, आपके स्नेह, प्रबल अनुमोदन और उत्साह वर्धन हेतु आपका हृदयतल से बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on October 2, 2013 at 11:08pm

प्रिय केवल जी आज के बिगड़ते हालत पे जबरदस्त कटाक्ष ...अच्छी रचना ...काश आँखें इससे भी खुलें
आभार
भ्रमर ५

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 2, 2013 at 10:54pm

आ0 भण्डारी भार्इ जी, आपके स्नेह और अनुमोदन के लिए आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 2, 2013 at 10:53pm

आ0 जितेन्द्र भार्इ जी, आपके स्नेह और अनुमोदन के लिए आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 2, 2013 at 10:52pm

आ0 विजय भार्इ जी, आपके स्नेह और सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 2, 2013 at 10:51pm

आ0 अरून अनन्त भार्इ जी, आपके स्नेह और सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 2, 2013 at 10:50pm

आ0 राम शिरोमणि भार्इ जी, आपके स्नेह और सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 2, 2013 at 10:49pm

आ0 बृजेश भार्इ जी, आपके स्नेह और सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by ram shiromani pathak on October 1, 2013 at 7:11pm

आदरणीय केवल भाई जी,

बहुत सुन्दर घनाक्षरी //हार्दिक बधाई आपको //सादर

कृपया ध्यान दे...

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