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!!! एक 'बापू' फिर बुला मां शारदे !!!

!!! एक 'बापू फिर बुला मां शारदे !!!
बह्र-2122  2122  212

प्यार जीवन में बढ़ा मां शारदे।
दर्द मुफलिस का घटा मां शारदे।।

कंट के रस्ते भी फूलों से लगे,
राम का वनवास गा मां शारदे।

भील-शोषित का यहां उध्दार हो,
एक 'बापू' फिर बुला मां शारदे।

धर्म का रथ आस्मां में जा रहा,
गर्त में धरती उठा मां शारदे।

आततायी रोज बढ़ते जा रहे,
फिर शिवा-राणा बना मां शारदे।

लेखनी का रंग गहरा हो चटक,
घाव पर मलहम लगा मां शारदे।

दृढ़ करो संवेदना सदभाव से,
आप ही परमात्मा मां शारदे।

कर्म का फल भूल जाओं धर्म में,
भाव 'सत्यम' साधना मां शारदे।

के0पी0सत्यम / मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 4, 2013 at 8:19pm

आदरणीय अन्नपूर्णा जी। आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदयतल से बहुत-बहुत आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 4, 2013 at 8:17pm

आदरणीय सुशील भार्इ जी।  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदयतल से बहुत-बहुत आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 4, 2013 at 8:15pm

आदरणीय सौरभ सर जी। चूंकि मैंने बह्र को कापी-पेस्ट किया था, किन्तू गजल के अनुरूप 2122, 2122, 212 के अतिरिक्त शेष मात्रा हटाना भूल गया। गजल की जमीन इसी बह्र पर ही लिखी गर्इ है। आपके स्नेह और उपकार दृषिट हेतु आपका हृदयतल से बहुत-बहुत आभार। सादर,

Comment by Sushil.Joshi on October 4, 2013 at 6:33am

आदरणीय केवल भाई जी... बहुत ही सुंदर भाव हैं.... गज़ल के शिल्प का मुझे ज्ञान नहीं है.... पर भावों को व्यक्त करने के लिए बधाई..

Comment by annapurna bajpai on October 3, 2013 at 9:39pm

आदरणीय केवल भाई जी सुंदर गजल बधाई आपको । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 3, 2013 at 9:32pm

मिसरों का वज़्न लिखा है - 2122  2122  2122  212

लेकिन एक मिसरा इस वज़्न के अनुरूप नहीं है. 

बहरहाल, इस प्रयास पर हार्दिक बधाई, भाई जी..

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 3, 2013 at 8:38pm

आदरणीय बृजेश नीरज भार्इ जी,    आपके अपार स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु...आपका तहेदिल से आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 3, 2013 at 8:37pm

आदरणीय अखिलेश भार्इ जी,    आपके अपार स्नेह और  गजल अनुमोदन हेतु...आपका तहेदिल से आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 3, 2013 at 8:36pm

आदरणीया गीतिका वेदिका जी,    आपके स्नेह और उत्साहवर्धन  हेतु...आपका तहेदिल से आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 3, 2013 at 8:34pm

आदरणीय आशुतोष भार्इ जी,    आपके अपार स्नेह और गजल अनुमोदन हेतु...आपका तहेदिल से आभार। सादर,

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