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१.

टेढ़ी मचिया

टिमटिमाता दिया

टूटी खटिया.

 

२.

वर्षा की बूँदें

रिसती हुई छत

गीली है फर्श.

 

३.

छीजती आस

बिखरते सपने

टूटा साहस.

 

४.

छोटी सी जेब

बढती महंगाई

भूखा है पेट.

 

५.

बूढ़ा छप्पर

दरकती दीवार

खंडित द्वार.

 

६.

ठंडा है चूल्हा

अस्त होता सूरज

छाया कोहरा. 

     - बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by बृजेश नीरज on October 7, 2013 at 6:56pm

आदरणीया गीतिका जी आपका हार्दिक आभार! मेरे प्रयास को आपका आशीष मिला, ये मेरे लिए सौभाग्य की बात है!

Comment by वेदिका on October 7, 2013 at 1:32am

बढ़िया हाइकु रचे आपने आदरणीय बृजेश जी!

Comment by बृजेश नीरज on October 4, 2013 at 9:59am

 आदरणीय संजय 'हबीब' जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 4, 2013 at 9:49am

बहुत सुंदर हाईकु रचनाएँ आदरणीय ब्रजेश भाई जी....

सादर बधाई स्वीकारें....

Comment by बृजेश नीरज on October 4, 2013 at 8:25am

आदरणीय सुशील जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by Sushil.Joshi on October 4, 2013 at 6:34am

सुंदर हाइकु.... हार्दिक बधाई हो बृजेश जी....

Comment by बृजेश नीरज on October 3, 2013 at 11:04pm

आदरणीय सौरभ जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on October 3, 2013 at 11:04pm

 आदरणीया प्राची जी आपका हार्दिक आभार!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 3, 2013 at 10:21pm

अति उत्तम प्रयास हुआ है. हार्दिक बधाई, बृजेश भाईजी.

वाह !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 3, 2013 at 10:16pm

आम आदमी की ज़िंदगी के कई पहलुओं पर सुन्दर हायकू रचे हैं आ० बृजेश जी..

हार्दिक बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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