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मोतबर चुप है ( ग़ज़ल ) गिरिराज भंडारी

2122     1212    22  

       

जुल्म को देख रहगुज़र चुप है

गाँव सारा नगर नगर चुप है

खामुशी चुप ज़ुबां ज़ुबां है  चुप

दश्त चुप है शज़र शज़र चुप है

दोस्त चुप चाप दुश्मनी भी चुप

सारा आलम बशर बशर चुप है

जिसने देखा वही है दहशत में

इसलिये हर नज़र नज़र चुप है 

ज़ख्म चुप है,बहा लहू भी चुप

बेख़बर चुप ख़बर ख़बर चुप है

चुप है आईन तो दफा भी चुप

दुख यही है कि मोतबर चुप है

     **********

दश्त= जंगल 

आईन= कानून

मोतबर=जिसका एतबार किया हो,विश्वस्त

मौलिक एवँ अप्रकाशित्

( दोष  सुधार के बाद )

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 6, 2013 at 3:08pm

आदरणीया प्राची जी , आपने ग़ज़ल को मान दिया , मेहनत सफल हुई !!! उत्साह वर्धन के लिये बहुत शुक्रिया !!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 6, 2013 at 3:00pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी 

सब अशआर पसंद आये ... एक अलग सी मंज़र कशी है हर शेर में.. जो सच में चुप ही कर देती है और इस भयावाह पसरी खामोशी पर सोचने को मजबूर करती है.

सुन्दर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 5, 2013 at 6:36pm

आदरणीय सचिन भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका बहुत बहुत आभार !!!

Comment by Sachin Dev on October 5, 2013 at 1:31pm

आदरणीय गिरिराज जी .... बेहतरीन गजल के लिए हार्दिक बधाई आपको ! 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 5, 2013 at 1:09pm

आदरणीया  वन्दना जी , हौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया !!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 5, 2013 at 1:08pm

आदरणीय जितेन्द्र भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका बहुत बहुत आभार !!!!

Comment by vandana on October 5, 2013 at 12:56pm

बहुत बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 5, 2013 at 11:46am

दोस्त चुप चाप दुश्मनी भी चुप

सारा आलम बशर बशर चुप है....वाह! क्या कहने, गजब का शेर

बहुत बहुत बधाई आदरणीय गिरिराज जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 5, 2013 at 6:44am

आदरणीया coontee mukerji जी ,  गज़ल की सराहना के लिये आपका आभारी हूँ !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 5, 2013 at 6:41am

आदरणीय सौरभ भाई , दोष समझ मे आ गया , सुधार कर रहा हूँ ! फटकार के योग्य गलती को भी आप बहुत प्यार से बताते हैं ,

आपके प्यार और स्नेह के लिये आभारी हूँ !!!! प्रयास की सराहना के लिये आभार !!!

कृपया ध्यान दे...

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