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अक्सर मै सोचा करता हूँ

अक्सर मै सोचा करता हूँ,  ख़यालों में डूबकर|

तू आती तो मेरी जिंदगी यूँ रंगीन होती,

कलम चलती, कोई कोरा कागज़ रंग जाता|

मगर ये विधान, मेरे जीवन में तेरा खुबसूरत दखल,

खुबसूरत वक़्त, जो तूने बिताये मेरे साथकुछ पल|

आज भी सोचता है ये दिल, तसव्वुर में डूब कर|

अक्सर मै सोचा करता हूँ....................................

 

सुधि नहीं रहती है अब, मै तुझ से कहाँ आजाद हूँ|

कुछ लोग तरस खातें हैं मुझपे, कहतें हैं मै बरबाद हूँ|

मैं जो डूबा हुआ हूँ तुझ में, बिना चिंता फिक्र के,

तुम हो तो जहाँ अपना लगता है, लगता है मै आबाद हूँ|

अक्सर मै सोचा करता हूँ.......................................

 

 

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Comment by Veerendra Jain on January 13, 2011 at 11:13am

मैं जो डूबा हुआ हूँ तुझ में, बिना चिंता फिक्र के,

तुम हो तो जहाँ अपना लगता है, लगता है मै आबाद हूँ|

 

bahut hi sunder bhav ...Ashish ji...bahut bahut badhai..

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