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सॉरी सर (कहानी ) अंक - 2

सॉरी सर (कहानी )
लेखक - सतीश मापतपुरी
अंक - 2
---------------- गतांक से आगे ----------------------------------
इस छोटे से पत्र के समक्ष उन्हें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रामाणिक व्याख्या प्रस्तुत करने वाली अपनी हर पुस्तकें 
ओछी एवं छिछली लगने लगी थी.प्रो. सिन्हा चहलकदमी करते -करते एक कुर्सी पर थक कर निढाल हो गए.थोड़ी देर 
आँखें मूंद कर कुछ सोचते रहे,फिर जेब से वही पत्र निकाल कर आँखों के आगे फैला दिया.
           प्रो. भवेश चन्द्र सिन्हा मनोविज्ञान के कुछ इने -गिने प्रोफेसरों में से एक थे.अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय
सेमिनारों में उनके व्याख्यानों की भूरि-भूरि प्रशंसा हो चुकी थी.पत्र -पत्रिकाओं,जर्नलों आदि में उनके सम्बन्ध में
बहुत कुछ लिखा जा चुका था.आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से प्रो. सिन्हा के अनेक टॉक प्रसारित हो चुके थे. ज्ञान,
प्रतिभा एवं विद्वता का तेज-पुंज उनके चेहरे पर स्पष्ट दृष्टिगोचर था.पचपन की वयस में भी चेहरे की कांति एवं
आभा यौवन का आभास दिलाती थी.प्रो.सिन्हा के व्यक्तित्व में कुछ ऐसी ख़ास बात थी कि लोग बरबस उनकी तरफ 
आकर्षित हो जाते थे.विषम से विषम परिस्थिति को भी सहज एवं स्वाभाविक ढंग से झेल लेना प्रो. सिन्हा की
विशेषता थी.अपनी जान से प्रिय अपनी पत्नी सोनाली सरकार की मौत को अपने इकलौते पुत्र राकेश के लिए
खामोशी से झेल गए थे प्रो.सिन्हा.
          उस दिन बी.ए. पार्ट-2 के क्लास में सामाजिक अभिवृतियों पर व्याख्यान देते हुए आगे की बेंच पर बैठी
एक लड़की को देख कर प्रो.सिन्हा बूरी तरह चौंक पड़े थे.वह लड़की अजीब नज़रों से अपलक उन्हें घूर रही थी.
फिर उस दिन प्रो.सिन्हा को बीच में ही अपना व्याख्यान स्थगित कर देना पड़ा था.मनोविज्ञान विभाग में आकर
भी प्रो.सिन्हा उसी लड़की के बारे में घंटो सोचते रहे.यदि इस लड़की के गाल पर माशा होता और उसके बाल
लम्बे होते तो वह बिल्कुल सोनाली दिखती,सोचते -सोचते बुदबुदा उठे प्रो. सिन्हा.अचानक उनकी नज़र दरवाजे
पर गयी  और उसी लड़की को पर्दा हटाकर अपनी तरफ देखते हुए देखकर प्रो.सिन्हा उछल पड़े.प्रो. सिन्हा कुछ कहते
इसके पहले ही वह लड़की जा चुकी थी.----------- कौन है यह लड़की?-------------- मुझे ऐसे क्यों देखती है?-------
-------- और एक दिन क्लास में प्रो.सिन्हा ने उस लड़की से उसका नाम पूछ दिया.------ "सोनाली" ------- सोनाली
सुनते ही प्रो. सकते में आ गए, अनायास उनके मुंह से निकल पड़ा-- "सोनाली सरकार?" (क्रमश:)
           ---------- शेष अगले अंक में --------------------

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Comment

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Comment by satish mapatpuri on January 14, 2011 at 3:49pm

 आपने सदैव मेरी हौसला अफजाई की है गणेशजी, धन्यवाद.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 13, 2011 at 8:06pm
क्या बात है सतीश भईया, आप तो बहुत बढ़िया कहानी लिखते है , आप ऐसे ही लिखते रहे , आपमे कथ्य शिल्प की भी प्रतिभा है , जय हो !

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