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ज्योतिपर्व की रात में ,करो तिमिर का नाश!

सच ही जीता है सदा ,ऐसा हो विश्वास !!

शांतिदीप घर घर जले ,समय तभी अनुकूल !
आपस में सौहार्द हो,कटुता जाओ भूल !!

ज्योतिपर्व की रात में ,तुम्हे समर्पित तात !
जीवन यूँ जगमग रहे ,दीपों की सौगात!!

मन में शुभ संकल्प लो,हाँथो में ले दीप !
अंतस का कल्मष छटे ,मन का आँगन लीप !!

मन का अँधियारा छटे,कटे दम्भ का जाल !
पहनाओ कुछ इस तरह ,दीपों की इक माल !!

ज्योतिपर्व फिर आ गया ,लेकर शुभ सन्देश !
अँधियारा न दिखे कहीं ,फूले फले स्वदेश !!

जगमग करता ही रहे ,यह प्यारा संसार !
अँधियारे को त्यागकर ,भरो ज्योति भण्डार !!
***********************************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment

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Comment by ram shiromani pathak on November 4, 2013 at 2:48pm

बहुत  बहुत आभार आदरणीया  कुन्ती  जी  ,आपको भी दीपावली कि शुभ कामनाएं !!

Comment by ram shiromani pathak on November 4, 2013 at 2:47pm

बहुत  बहुत आभार भाई रमेश जी  ,आपको भी दीपावली कि शुभ कामनाएं !!

Comment by ram shiromani pathak on November 4, 2013 at 2:46pm

बहुत  बहुत आभार भाई आशीष जी ,आपको भी दीपावली कि शुभ कामनाएं !!

Comment by coontee mukerji on November 4, 2013 at 2:11pm

उत्तम विचार.शुभकामनाएँ सहित

कुंती

Comment by रमेश कुमार चौहान on November 3, 2013 at 11:04pm

आदरणीय राम शिरोमीणीजी दीपावली की आपको हार्दिक शुभकामना । प्रस्तुत बहुत ही सुंदर बन पडे है सादर बधाई

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on November 3, 2013 at 3:56pm

बढ़िया दोहे भाई !
दीपावली कि शुभ कामनाएं !!

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