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!!! मनमोहन रूप सॅंवार रहे !!!

!!! मनमोहन रूप सॅंवार रहे !!!
दुर्मिल सवैया- आठ सगण

मनमोहन  रूप  सॅंवार  रहे, छवि  देख रहे  जमुना जल में।
सब ग्वाल कमाल धमाल करें, झट कूद पड़े जमुना जल में।।
अधरों पर  ज्ञान भरी  मुरली, रस धार  बहे जमुना जल में।
गउ-ग्वालिन डूब गयीं रस में, तन  तैर रहे जमुना जल में।।

के0पी0सत्यम/ मौलिक व अप्रकाशित

 

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Comment

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Comment by Sushil.Joshi on November 14, 2013 at 5:19am

कान्हा की छटा को सुंदरता से बिखेरा है आपने...... हार्दिक बधाई आ0 केवल भाई....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 13, 2013 at 10:49pm

आदरणीय केवल भाई , लाजवाब दुर्मिल सवैया की रचना की है , गुनगुना के मज़ा आ गया !!!! हृदय से बधाई स्वीकार कयें !!!!

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 13, 2013 at 10:33pm

आपका मीटर सही है   संवार  में स पर बिंदु होने से वह गुरु हो जाता है पर चूँकि उसपर ज्यादा जोर नहीं है इसलिए चलेगा  कवि को यह छूट मयस्सर है  आपका प्रयास अति उत्तम

कृपया ध्यान दे...

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