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युवा क्रांति-रत्नेश रमण पाठक

आज देश भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगा रही है .इससे निकलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आरही है.हर नीति नाकामयाब दिख रही है .
ऐसे में जरुरत है युवा शक्ति की ,जो की देश को एक नयी दिशा दे ,इस गंगोत्री से निकाले.और इन सब के लिए जरुरी है युवाओं का राजनीती में भागीदारी सुनिश्चित होना.
मैं आह्वान करता हूँ की यदि हमें वंशवाद की राजनीति को खत्म करना है तो युवाओं को नए उमंग के साथ राजनीति में आना होगा। आज का युवा वर्ग अपने कर्तव्यों ,अधिकारों ,और देश प्रेम से मुह मोड़ रहा है .हर कोई अपने भविष्य की सोच रहा है ,अपने परिवार की सोच रहा है.लेकिन हमारा देश भी एक घर है,जिसका लगाम दिल्ली में बैठे हिजड़ों के हाथ में हैं.
जरा सोचिये अगर इसी तरह महात्मा गाँधी ,शुभाष चन्द्र बोस ,भगत सिंह ,खुदी राम बोस और जयप्रकाश नारायण ने सोचा होता तो क्या हम इस मुकाम पर पहुचते .इन वीर युवाओं ने अपने आप को देशहित में निस्वार्थ समर्पित कर दिया.
और एक बार फिर मौका आ गया है की हम एकजुट हो और लोकतंत्र का हिस्सा बनकर राजनीती की गन्दगी को साफ़ करें.
जिन उद्देश्यों को ले देश आजाद हुआ उसकी पूर्ति आज तक नहीं हुई। राजनीतिज्ञों ने राजनीति को धंधा बना लिया।
आज इस भारत आधुनिकता के दौर में युवा दिग्भ्रमित हो गए हैं,राजनीती में नहीं उतरना चाहते .क्यूँ?क्यूंकि इसका मुख्या कारन है राजनीती में बाहुबल और धनबल का प्रयोग, जिसे हम जड़ से उखाड़ फेकने की ताकत रखते है .जब हम युवा वर्षो से गुलाम भारत को अंग्रेजो से आजाद करा सकते है तो इन सियासत के कुत्तों से अपने भारत माता को आजाद कराना हमारे लिए नगण्य है.
मैं मानता हूँ की कुछ युवा राजनीती में उतरकर अपनी ईमानदारी ,काबिलियत,और शक्ति का परिचय देना चाहते हैं ,लेकिन उन्हें सिर्फ मोहरा बनाया जाता है,और अपने ही परिवेश ढालने की कोसिस की जाती है. पहले युवाओं के रोल माडल महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस, जेपी व अम्बेदकर आदि हुआ करते थे। आज के राजनीति में उनके समक्ष ऐसा कोई रोल माडल नहीं है। अब वो समय आ गया है,अपने देश की बागडोर सँभालने का| . युवा शक्ति ही राजनीति को नई दिशा दे सकती है। युवा नजर बदलें--- देश के नजारे बदल जाएंगे। ऐसा हम अपने डंके की चोट पर कह रहे हैं.
हमें दुष्यंत की ..".कौन कहता है की आसमाँ में सुराख़ नहीं हो सकता ,एक पत्त्थर तो तबियत से उछालो यारो"....इन पंक्तियों से सिख लेना चाहिए और राजनीती में आगे आना चाहिए.
हम और आप युवा ही वंशवाद व भ्रष्टाचार से राजनीति को मुक्त करा सकते हैं.हम एकजुट होंगे अपने शौर्य और बुद्धिमानी से देश की दशा व दिशा बदलेंगे|.
वक़्त आने पर बतादेंगे ऐ आसमाँ ...हम अभी से क्या बताएं
क्या हमारे दिल में हैं.
हमें क्रांति लानी होगी एक बार फिर हमें अपनी ताकतों का परिचय देना पड़ेगा.और इस क्रांति का नाम युवा क्रांति होनी चाहिए.

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