For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल- सारथी || कली बेजार है ||

कली बेजार है, अपनी नजाकत से

बला की खूबसूरत हैं, क़यामत से/१

अकेला हुस्न जो देखा सरे-महफ़िल

तो हम पहलू में जा बैठे शरारत से /२

ज़मीं पर चाँद उतरा है ख़ुशी है ; पर

सितारे ग़मज़दा हैं इस बगावत से /३

बदन सोने सरीखा है , अगर मानो 

जरा सा तिल लगा दूँ मैं, इजाजत से /४

बड़े खामोश रहते हो, वजह क्या है

समंदर दिल में रक्खा है हिफाजत से/५

सुना जो बागबां से आप का किस्सा

गुलिस्तां छोड़ आये हैं शराफ़त से /६

मेरी माँ फिक्रमंदी में, दुआगो है

के रख अल्लाह बेटे को मुहब्बत से /७

.................................................

वज्न: १२२२ १२२२ १२२२ 

सर्वथा मौलिक व अप्रकाशित 

 

Views: 795

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Saarthi Baidyanath on November 29, 2013 at 10:48am

 आदरणीया annapurna bajpai जी और श्री  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी , तहे-दिल से शुक्रिया आपका ! स्नेह देते रहिएगा ..आपका प्यार , आपका मार्गदर्शन नितांत आवश्यक है मेरे लिए ! सादर नमन सहित :)

Comment by Saarthi Baidyanath on November 29, 2013 at 10:42am

आदरणीय  गिरिराज भंडारी जी , बहुत बहुत धन्यवाद आपका ! महती कृपा आपकी जो इन मूल बिन्दुओं की तरफ ध्यान दिलाते हैं ! ऋणी रहूँगा ! कुछ गिने चुने सज्जनों का हमेशा ही इस मंच से विशेष आशीष मिलता है ..जो ग़ज़ल परिष्करण में , मेरे ज्ञान वृद्धि में सहायक होता है ! आपके सुझाव के पश्चात् निश्चित ही ग़ज़ल कहने लायक हो जाएगी ! मान्यवर, कोटिशः सहृदय आभार ! :)


Comment by Saarthi Baidyanath on November 29, 2013 at 10:34am

आदरणीय  Shyam Narain Verma जी , शुक्रगुजार हूँ आपकी इनायतों का ..! मेहरबानी आपकी ! सादर नमन सहित :)

Comment by vandana on November 29, 2013 at 7:43am

बड़े खामोश रहते हो वजह क्या है

समंदर दिल में रक्खा है हिफाजत से/५

सुना जो बागबां से आप का किस्सा

गुलिस्तां छोड़ आये हैं शराफ़त से 

बहुत बढ़िया आदरणीय ...बहुत बहुत बधाई 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 29, 2013 at 6:53am

बहुत बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही है आप ने ...

बड़े खामोश रहते हो वजह क्या है

समंदर दिल में रक्खा है हिफाजत से.... क्या कहनें बाई इस शेर के ....
.
बदन "सोना" की जगह "सोने" होता तो व्याकरण सम्मत होता .... आदरणीय गिरिराज जी की सलाह भी गौर तलब है ...
मक्ते में "सलामत से" ठीक नहीं है .... सलामत पर ही मिसरा पूर्ण हो रहा है .. आप शब्दों के जादूगर है ..ये छोटी मोटी फाइन ट्यूनिंग,आसानी से कर सकतें है .... बहुत बहुत बधाई    

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 28, 2013 at 8:34pm

सारथी जी

क्या  खूब अशआर है

आपको माँ की दुआए मयस्सर हो

मगर गिरिराज जी की बात पर भी ध्यान दे i

शत-शत शुभ कामनाये  i

Comment by annapurna bajpai on November 28, 2013 at 7:37pm

सुंदर गजल के लिए हार्दिक बधाई आ0 सारथी जी । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 28, 2013 at 5:17pm

आदरणीय वैद्यनाथ भाई , !!! ग़ज़ल खूब सूरत कही है , आपको बहुत बहुत बधाई !!!!!

दो शेरों मे शब्दों मे गलती लग रही है ---कली बेजार है, उनकी नजाकत से ---- यहाँ , उनकी बहुवचन लग रहा है , जबकी कली एक वचन मे है --- अपनी शब्द के विषय मे सोच कर देखियेगा , शायद सही लगे आपको

2 --जरा सा तील लगा दूँ मैं, इजाजत से  --- तील को तिल कर लीजियेगा - मिसरा बे बह्र हो रहा है !!!!

Comment by Shyam Narain Verma on November 28, 2013 at 1:00pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।संबंधों को निभा रहे, जैसे हो दस्तूर…See More
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"समसामयिक विषय है ये। रियायत को ठुकराकर अपनी काबलियत से आगे बढ़ना अच्छा है,पर इतना स्वाभिमान कम ही…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। समसामयिक और सदाबहार विषय और मुद्दों पर सकारात्मक और…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service