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सीएफ़एल बोली, "हे बल्ब महोदय! आप ऊर्जा बहुत ज्यादा खर्च करते हैं और रोशनी बहुत कम देते हैं। मैं आपकी तुलना में बहुत कम ऊर्जा खर्च करके आपसे कई गुना ज्यादा रोशनी दे सकती हूँ।"

 

बल्ब महोदय ने चुपचाप सीएफ़एल के लिए कुर्सी खाली कर दी। रोशनी फैलाने वालों के इतिहास में बल्ब महोदय का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा गया।

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by coontee mukerji on December 8, 2013 at 3:58pm

बहुत खूब................... रोशनी फैलाने वालों के इतिहास में बल्ब महोदय का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा गया।

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 8, 2013 at 9:58am

जय हो सर जी ......................बेहतरीन सन्देश पिरोया है आपने इस लघुकथा के माध्यम से ...............यदि ऐसा हो जाए तो देश का विकाश दिन दूना और रात चौगुना हो

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