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कुण्डलियां-1


कुत्ता प्यारा जीव है, वफादार बलवान।
घर की  नित रक्षा करे, रख पौरूष अभिमान।।
रख पौरूष अभिमान, गली का शेर कहाए।
चोर और अंजान, भाग कर जान बचाए।।
द्वार रहे गर श्वान, शान ज्यों माणिक मुक्ता।
पर मानव मक्कार, अहम वश कहता कुत्ता।।


के0पी0सत्यम-मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 21, 2013 at 7:36pm

आ0 अन्नपूर्णा जी, आपके जीवों के लिए अपार स्नेह और प्रेम से परिपूर्ण प्रसंशनीय उदगार हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 21, 2013 at 7:31pm

आ0 गोपाल भाई जी, आपके जीवों के लिए अपार स्नेह और प्रेम से परिपूर्ण प्रसंशनीय उदगार हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 21, 2013 at 7:29pm

आ0 कुन्ती जी, आपके जीवों के प्रति अपार स्नेह और दया से परिपूर्ण प्रसंशनीय उदगार हेतु आपका हार्दिक आभार। ----जी! जयकिशन उर्फ जैकी की ओर से आपको वालेकुमअस्सलाम....।   सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on December 21, 2013 at 7:15pm

आ0 मीना जी, आपके स्नेह एवं प्रसशनीय उदगार हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर,

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on December 20, 2013 at 10:39pm

बधाई केवल भाई, सुंदर कुण्डलिया  की।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 20, 2013 at 8:26pm

मजेदार कुण्डलिया ..बधाई आपको मुझ जैसे डॉग लवर को तो और ज्यादा पसंद आएगी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 20, 2013 at 8:25pm

आदरनीय केवल भाई , सुन्दर कुंडलिया रची है । आपको बधाई ॥

Comment by savitamishra on December 20, 2013 at 7:19pm

बहुत सुंदर

Comment by Shyam Narain Verma on December 20, 2013 at 3:39pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………
Comment by annapurna bajpai on December 20, 2013 at 2:42pm

सुंदर कुण्डलिया हेतु बहुत बधाई आपको आ0 केवल भाई जी । 

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