For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कविता : - केवल तूने ही नहीं खाईं गोलियाँ ..

कविता : -केवल तूने ही नहीं खाईं गोलियाँ ..

बापू केवल तूने ही नहीं

अपने सीने पर खाईं गोलियाँ

और कहा हे राम !

आज जब जब कोई चलता तुम्हारी राह

देश हित होती उसकी चाह

मिलती उसे कराह

ज़िंदा जलाया जाता है उसे

गोलियाँ भी मारी जाती हैं

और तुम्हारा रामराज का सपना

जाने कब का टूट

और पीछे छूट  चुका

अब तो व्यवस्था भी बेबस दिखती

जाने किन हांथों बिकती

तेरे बहुजन राम भरोसे

उनकी हर रोटी

कई टुकड़ों में बंटती

और झोपड़ी तक आते आते

नहीं बंचती

हम कलमकार

लगता हुए बेकार

आज शब्द अंगारे उगलते है

मगर जलते नहीं वो

जिनकी चमड़ी हो गयी है

बेहद मोटी

शैतानों सी

वे मानव हैं

या आदिमानव

या उससे भी बद्तर

बापू !

नाथूराम आज भी चलाते जा रहा है

चौथी - पांचवी - छठी...

निरंतर गोलियाँ

उनके सीने पर

जिन्हें तुम्हारे आदर्श

लुभाते ही नहीं रास्ता दिखाते हैं

बापू इसी लिये कहता हूँ

सिर्फ तुमने ही नहीं खाईं गोलियाँ

सिर्फ तुमने ही नहीं कहा

हे राम !!!


 

 

Views: 682

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on February 6, 2011 at 10:50am
अक्षय ठाकुर जी आपके शब्दों के लिये आभारी हूँ |स्नेह बनाए रखिये |
Comment by Akshay Thakur " परब्रह्म " on February 6, 2011 at 9:54am
कविता के माध्यम से भारत की वर्तमान दशा का प्रत्यक्ष वर्णन किया है आपने.. बधाई स्वीकार करें :)
Comment by Abhinav Arun on January 30, 2011 at 9:38pm
शुक्रिया राकेश जी !!
Comment by Abhinav Arun on January 28, 2011 at 1:55pm
आदरणीया वंदना जी , सर्वश्री वीरेंद्र जी ,वीनस जी ,नवीन जी ,शेष जी ,आशीष जी ,गणेश जी ,विवेक जी आप सब ने मेरा हौसला बढ़ाया आभारी हूँ | जब अपनी बात औरों तक पहुंचकर उनकी प्रशंसा पाती है तो अच्छा लगता है और दायित्व बोध भी होता है| और भी अच्छा करने का निरंतर प्रयास रहेगा |
Comment by Veerendra Jain on January 28, 2011 at 11:11am
अरुणजी ...आज की दशा का बिलकुल सटीक वर्णन किया है आपने , दिल को छू लेने वाली रचना के लिए हार्दिक बधाई..
Comment by वीनस केसरी on January 28, 2011 at 1:47am
विचारोत्तेजक कविता


नाथूराम आज भी चलाते जा रहा है
चौथी - पांचवी - छठी...
निरंतर गोलियाँ
उनके सीने पर
जिन्हें तुम्हारे आदर्श
लुभाते ही नहीं रास्ता दिखाते हैं
बापू इसी लिये कहता हूँ
सिर्फ तुमने ही नहीं खाईं गोलियाँ
सिर्फ तुमने ही नहीं कहा
हे राम !!!

खूब पसंद आई
Comment by आशीष यादव on January 27, 2011 at 2:46pm
अरुण सर एक मर्म स्पर्शी रचना के लिए बहुत बहुत बधाई| सच आपने एक खुबसूरत सच लिखा है| आज भी नाथू ख़त्म नहीं हुए| आज भी लुटने वाले काले गोरे अभी ख़त्म नहीं हुए| राम राज धरा रह गया|

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 26, 2011 at 11:32pm
बेहद खुबसूरत रचना , ह्रदय को छू लेने वाली काव्य कृत प्रस्तुत किया है आपने, आपने सही कहा है गाँधी जी को तो एक नाथू राम ने मारा यहाँ तो पग पग पर कितने नाथू राम भरे पडे है | गणतंत्र और खुबसूरत कविता पर बधाई अरुण जी |
Comment by विवेक मिश्र on January 26, 2011 at 10:35pm
एक मर्मस्पर्शी रचना और साथ ही सटीक छायाचित्र संयोजन. शुभकामनायें स्वीकार करें.
Comment by Abhinav Arun on January 26, 2011 at 8:17pm

मुझे अभी अभी इसे सजीव ओ.बी.ओ. पर लिख कर बहुत संतोष हुआ ! और मन से एक बोझ उतरने का एहसास भी | अपनी बात कह लेने का एक मंच देने के लिये ओ.बी.ओ. को हार्दिक धन्यवाद | जीवन की एक कमी पूरी हुई इस साईट से जुडकर |पूरी टीम को शुभकामनाएं !!!!

सृजन रथ चलता बढ़ता रहे खूब नाम कमाए अपना ओ.बी.ओ. |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"शुभ प्रभात,  आदरणीय! चौपाई छंद:  भेदभाव सच सदा न होता  वर्ग- भेद कभी सच न…"
2 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद +++++++++ करे मरम्मत जूते चप्पल। काम नित्य का यही आजकल॥ कटे फटे सब को सीता है। सदा…"
2 hours ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
13 hours ago
Admin posted discussions
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
Wednesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Feb 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service