कविता : -केवल तूने ही नहीं खाईं गोलियाँ ..
बापू केवल तूने ही नहीं
अपने सीने पर खाईं गोलियाँ
और कहा हे राम !
आज जब जब कोई चलता तुम्हारी राह
देश हित होती उसकी चाह
मिलती उसे कराह
ज़िंदा जलाया जाता है उसे
गोलियाँ भी मारी जाती हैं
और तुम्हारा रामराज का सपना
जाने कब का टूट
और पीछे छूट चुका
अब तो व्यवस्था भी बेबस दिखती
जाने किन हांथों बिकती
तेरे बहुजन राम भरोसे
उनकी हर रोटी
कई टुकड़ों में बंटती
और झोपड़ी तक आते आते
नहीं बंचती
हम कलमकार
लगता हुए बेकार
आज शब्द अंगारे उगलते है
मगर जलते नहीं वो
जिनकी चमड़ी हो गयी है
बेहद मोटी
शैतानों सी
वे मानव हैं
या आदिमानव
या उससे भी बद्तर
बापू !
नाथूराम आज भी चलाते जा रहा है
चौथी - पांचवी - छठी...
निरंतर गोलियाँ
उनके सीने पर
जिन्हें तुम्हारे आदर्श
लुभाते ही नहीं रास्ता दिखाते हैं
बापू इसी लिये कहता हूँ
सिर्फ तुमने ही नहीं खाईं गोलियाँ
सिर्फ तुमने ही नहीं कहा
हे राम !!!
Comment
मुझे अभी अभी इसे सजीव ओ.बी.ओ. पर लिख कर बहुत संतोष हुआ ! और मन से एक बोझ उतरने का एहसास भी | अपनी बात कह लेने का एक मंच देने के लिये ओ.बी.ओ. को हार्दिक धन्यवाद | जीवन की एक कमी पूरी हुई इस साईट से जुडकर |पूरी टीम को शुभकामनाएं !!!!
सृजन रथ चलता बढ़ता रहे खूब नाम कमाए अपना ओ.बी.ओ. |
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