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कविता :- कहाँ गणतंत्र

कविता :- कहाँ गणतंत्र

 

फेल हुए सब मंत्र

कहाँ गणतंत्र ?

किसने बोया कौन काटता

किसको बांटे कौन बांटता

थोथे सारे यंत्र

कहाँ गणतंत्र ?

 

तुम ही बोलो

कब बोलोगे ?

किसने खोया कौन पा रहा

देश राग ये कौन गा रहा

कवि कहाँ क्यों मौन ?

 

आदर्शों की हाट बिक गयी

जो सच्ची थी ठाट बिक गयी

मिथ्या का आधार

है बंटाधार

कवि तुम कब बोलोगे ?

 

आम आदमी पिसा जा रहा

संघर्षों में मात खा रहा

अनुनय विनय पतन आघात  

किसके हाथ अनाथ

कवि कुछ तो बोलोगे ?

 

मीनारें सज गयीं सुनहरी

अपनी ही सत्ता है बहरी

खेल मदारी का है जारी

आज जमूरे की है बारी

आँखे खोल कवि कुछ बोल ?

 

आज हिमाला फिर पिघला है

पीर नहीं यह सच निकला है

जनता मांगे हक

नहीं बहक

कवि तुम कब बोलोगे ?

 

आस नहीं विश्वास भी खोया

पाप है किसका किसने धोया

गंगा बंधकर रुदन करती

सब कुछ सहती

कवि तू पढ़ कुछ मन्त्र

कहाँ गणतंत्र ?

 

 

 

 

Views: 650

Comment

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Comment by Abhinav Arun on January 28, 2011 at 2:06pm
आदरणीय सर्वश्री वीरन्द्र जी ,प्रभात जी एवं गणेश जी आपने रचना पढ़ी और टिप्पणी दी मैं अनुगृहित हुआ | इससे साहित्य की जीवन्त्तता और सार्थकता की अनुभूति होती है |
Comment by Veerendra Jain on January 28, 2011 at 11:26am
Arun ji... ek jhakjhorne wali kavita ke liye bahut bahut badhai...
Comment by prabhat kumar roy on January 28, 2011 at 6:06am
ARUN KUMAR PANDEY 'ABHINAV' has really written a vary good poem on REPUBLIC, which depicts the harsh and blatant reality of our socalled democratic system. 

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 27, 2011 at 9:18am
आम आदमी पिसा जा रहा
संघर्षों में मात खा रहा
अनुनय विनय पतन आघात  
किसके हाथ अनाथ
कवि कुछ तो बोलोगे ?
कवि ह्रदय तो बोलेगा ही चीत्कार भी करेगा , वो कहा मौन रहने वाला , बहुत ही खुबसूरत और सार्थक रचना , बधाई अरुण भाई |
Comment by Abhinav Arun on January 26, 2011 at 6:40pm
सर्वश्री नवीन जी , संजय जी , अजय जी , दिनेश जी आप सबका आभार और सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !! सृजन चक्र चलता रहे इसमें आपका प्रोत्साहन मिला धन्यवाद !!
Comment by Abhinav Arun on January 26, 2011 at 6:38pm
आदरणीय श्री राजेंद्र जी आपकी टिप्पणी मुझमे हौसला और उर्जा का संचार करेगी आभार !!!
Comment by Rajendra Swarnkar on January 26, 2011 at 5:28pm
अरुण कुमार जी,
नमस्कार !

'कहाँ गणतंत्र' बहुत विचारणीय , प्रेरक और ओजस्वी कविता है ।
बधाई !

********************************
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं !
********************************

राजेन्द्र स्वर्णकार
swarnkarrajendra@gmail.com
जयहिंद ! वंदे मातरम् !
Comment by Dinesh Kumar on January 26, 2011 at 11:56am
bahut hi sashakt rachana ke liye sadhuvad.
Comment by Ajay Singh on January 26, 2011 at 11:16am
VERY VERY GOOOOOOOD.......
Comment by Sanjay Kumar Singh on January 26, 2011 at 11:05am
achchi Rachna aur Gantara divas ki badhai ho aapko |

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