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आज गहरे अंतस में

न जाने कैसी 

अजीब सी 

छाया बन रही है 

लगातार जारी है 

समझने की नाकाम कोशिश .... 

मगर छाया नहीं सुलझती 

दौड़ रहा हूँ ... 

बीते हुये कल के 

हर एक के जानिब को 

शायद वो हो ... 

नहीं वो नहीं है ... 

अच्छा वो हो सकता है 

मगर कहाँ भागूँ 

कितना भागूँ ... 

बहुत दूर आ  चुका हूँ 

वापस जाना मुमकीन नहीं हैं 

अंतस में 

छाया और गहरी 

होती जा रही है 

अजीब सा लगता है 

जब कोई अपना हो 

और अपना न भी हो 

छाया तो छाया ही है 

मगर है तो किसी

अपने की 

है न .... 

लगाव सा हो गया है 

मगर पहचान नहीं पा रहा 

कोई - कोई उलझन अच्छी 

लगती है ... 

सुलझे बगैर ... 

उलझन ... उलझन ही है .... 

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Amod Kumar Srivastava on January 10, 2014 at 8:28pm

आ0 वंदना जी, आ0 सौरभ पांडे जी, आ0 बृजेश नीरज जी, आ0 बैद्यनाथ सारथी जी, आ0 अरुण शर्मा जी, आ0 जितेंद्र गीत जी, आ0 अन्नपुरना जी, आ0 मुकर्जी जी, आ0 गिरिराज भण्डारी जी आप सभी का बहुत बहुत आभार ....

Comment by vandana on January 9, 2014 at 5:53am

बिलकुल ठीक कहा आपने -

कोई - कोई उलझन अच्छी 

लगती है ... 

कभी कभी उलझनें बहुत कुछ सिखा जाती हैं अत: देर तक साथ रहती हैं तो प्रिय भी हो जाती हैं 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 9, 2014 at 2:12am

बधाइयाँ.. बहुत खूब भाईजी..

Comment by बृजेश नीरज on January 7, 2014 at 1:11pm

अच्छी रचना है! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by Saarthi Baidyanath on January 6, 2014 at 10:43pm

ज़िन्दगी की पहेलियों को सुलझाने में लगा मन !...अच्छी रचना ..पठनीय रचना ...सादर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 6, 2014 at 11:45am

आदरणीय आमोद भाई जी बेहद सुन्दर रचना बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 6, 2014 at 10:17am

छाया तो छाया ही है 

मगर है तो किसी

अपने की 

है न .... 

लगाव सा हो गया है 

मगर पहचान नहीं पा रहा 

कोई - कोई उलझन अच्छी 

लगती है ... 

सुलझे बगैर ... 

उलझन ... उलझन ही है ...........अपनों के बीच ,अंतर का विश्लेषण बहुत प्रभावी है, बधाई स्वीकारें आदरणीय आमोद जी

Comment by annapurna bajpai on January 5, 2014 at 4:38pm

अच्छी रचना , बधाई ।

Comment by coontee mukerji on January 5, 2014 at 3:55pm

मांसिक उधेड़बुन  की बहुत बहुत अभिव्यक्ति ........आपको बहुत बधाई.सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 5, 2014 at 9:59am

आदरणीय आमोद भाई , सुन्दर भाव अभिव्यक्ति के लिये बधाइयाँ ॥

कृपया ध्यान दे...

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