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पीना न तुम शराब ये आदत ख़राब है

221 2121 1221 212

पीना न तुम शराब ये आदत ख़राब है 
कहती है हर किताब ये आदत ख़राब है 
बदनाम तुमने कर दिया देखो शराब को 
पीते हो बेहिसाब ये आदत ख़राब है 

कोई सवाल पूछे बला से जनाब की
देते नहीं जवाब ये आदत ख़राब है

इक घूँट जिसने पी कभी कैसे कहे बुरा 
हरगिज न हो जवाब ये आदत ख़राब है

तकदीर से ये हुस्न मिला है तो क़द्र कर 
जाए न कर शबाव ये आदत ख़राब है
अब छोडिये गुजार दी शब् मयकशी में यूं 
कहते हैं सब गुलाब ये आदत ख़राब है 
वाइज मिला था यार मुझे मैकदे में  कल
पीकर कहे शराब ये आदत ख़राब है
पी मय को आशु झूंठ कोई बोलता नहीं
उसको कहा ख़राब ये आदत ख़राब है  

मौलिक व अप्रकाशित 

  

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Comment

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 13, 2014 at 10:37am

आदरणीय अजय जी, आदेर्नीया कुंती जी ..आपके उत्साहवर्धन के लिए तहे दिल धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 13, 2014 at 10:36am

आदरणीय गिरिराज भाईसाब ..बिलकुल सही तथ्य पर ध्यान दिलाया अपने ..इस ग़ज़ल के कुछ शेर मैंने इसलिए हटा दिए थे की ठीक करके जोड़ दूंगा लेकिन गलती वश इन्हें नहीं हटा सका .संशोधन होने के बाद ही इन्हें जोडूंगा..बहुत बहुत धन्यवाद मुझे मेरी खता से परिचित करने के लिए ..हार्दिक धन्यवाद के साथ सादर 

Comment by coontee mukerji on January 12, 2014 at 9:50pm

पीना न तुम शराब ये आदत ख़राब है 

कहती है हर किताब ये आदत ख़राब है .....बहुत खूब.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 12, 2014 at 6:07pm

आदरणीय , आशुतोष भाई , सुन्दर गज़ल के लिये बधाई  !!

आदरणीय ग़ज़ल के कुछ शे र बिना काफिये के रह गये है , गज़ल के खारिज हो रहे हैं ॥

खामोश रहिये आज तो रिन्दों की बज्म में 

भूले से भी न कहना ये आदत ख़राब है

जब हुश्न के नशे में मय का भी नशा मिला

किसको रहा था याद ये आदत ख़राब है  ------------ दोनो शेर को फिर से देख लीजिये

Comment by Ajay Agyat on January 12, 2014 at 5:26pm

पीना न तुम शराब ये आदत ख़राब है 

कहती है हर किताब ये आदत ख़राब है 

मुफलिस को भी नवाब जो पल भर में बना दे 

उसको जहर ख़िताब ये आदत ख़राब है 

बदनाम कर दिया है खुद तुमने शराब को 

पीते हो बेहिसाब ये आदत ख़राब है 

इक घूँट जिसने पी कभी कैसे कहे बुरा 

हरगिज न हो जवाब ये आदत ख़राब है ..... अच्छे अशआर 

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