For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ajay Agyat
  • Male
  • Faridabad, Haryana
  • India
Share

Ajay Agyat's Friends

  • lal  bihari lal / lal kala munch
  • अरुन शर्मा 'अनन्त'
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"

Ajay Agyat's Groups

 

Welcome, Ajay Agyat!

Latest Activity


मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" and Ajay Agyat are now friends
Apr 1, 2017
Ajay Agyat commented on Admin's group हिंदी की कक्षा
"नमस्कार। कृपया संस्कार शब्द की मात्र गणना बतायें"
Mar 31, 2017

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर commented on Ajay Agyat's blog post ग़ज़ल
"अशआर बढ़िया और असरदार, लेकिन सिर्फ चार ? क्यों सरकार ?"
Dec 10, 2014

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Ajay Agyat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अजय भाई , लाजवाब गज़ल कही , हार्दिक बधाई !"
Dec 2, 2014
ram shiromani pathak commented on Ajay Agyat's blog post ग़ज़ल
"ज़ोरदार कहन आदरणीय //बहुत बधाई "
Dec 2, 2014
Hari Prakash Dubey commented on Ajay Agyat's blog post ग़ज़ल
"सुन्दर रचना पर आपको हार्दिक बधाई श्री अजय जी !"
Dec 2, 2014
Abhinav Arun commented on Ajay Agyat's blog post ग़ज़ल
"लाजवाब और पुरअसर ..बधाई आदरणीय !!"
Dec 2, 2014

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on Ajay Agyat's blog post ग़ज़ल
"शानदार अशआर ।"
Dec 2, 2014
भुवन निस्तेज commented on Ajay Agyat's blog post ग़ज़ल
"संकल्पों के मन्त्र मैं जब भी जपता हूँ मंज़िल मेरे और निकट आ जाती है वाह आदरणीय, बहुत खूब...."
Dec 1, 2014
Shyam Narain Verma commented on Ajay Agyat's blog post ग़ज़ल
""बहुत खूब ,बहुत सुन्दर गजल""
Dec 1, 2014
somesh kumar commented on Ajay Agyat's blog post ग़ज़ल
"आप को पहली बार पढ़ रहा हूँ ,पर गज़ल की गहनता आप के हुनर और अनुभव को स्पष्ट चित्रित करती है "
Nov 30, 2014
Ajay Agyat posted a blog post

ग़ज़ल

ग़ज़ल के 4 अशआर सन्नाटों पर खूब सितम बरपाती है मेरे भीतर तन्हाई चिल्लाती है संकल्पों के मन्त्र मैं जब भी जपता हूँ मंज़िल मेरे और निकट आ जाती है पूरी क्षमता से जब काम नहीं करता मेरी किस्मत भी मुझ पर झल्लाती है हर पल तुझ को याद किया करता हूँ मैं याद विरह के दंशों को सहलाती हैमौलिक व अप्रकाशित .... See More
Nov 30, 2014
Ajay Agyat commented on Ayub Khan "BismiL"'s blog post ग़ज़ल (अय्यूब खान "बिस्मिल")
"वाह... "
Nov 30, 2014
Ajay Agyat commented on CHANDRA SHEKHAR PANDEY's blog post रौशनी बारूद से होती नहीं है दोस्तो
"उम्दा"
Nov 30, 2014
Ajay Agyat commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल - इससे बढ़कर कोई अनर्गल क्या ? // --सौरभ
"अति उत्तम "
Nov 30, 2014
Ajay Agyat commented on Dr. Rakesh Joshi's blog post मैं गीतों को भी अब ग़ज़ल लिख रहा हूँ (डॉ. राकेश जोशी)
"बहुत उम्दा "
Nov 30, 2014

Profile Information

Gender
Male
City State
faridabad
Native Place
delhi
Profession
engg
About me
poetry my intt

ग़ज़ल

हँसते हँसते आज विदाई देता है 
बूढ़ी माँ को कौन दवाई देता है ...
पागल कर डाला है इस बीमारी ने 
सन्नाटों में शोर सुनाई देता है ..
जब भी तेरी आँखों में आँखें डालूँ 
मुझ को मेरा अक्स दिखाई देता है.. 
तेरी ज़ुल्फों की खुशबू के क्या कहने 
गुलशन का हर फूल दुहाई देता है ....
जलता है शब भर जो दीपक, उस को खुद 
सूरज आ कर ढेर बधाई देता है ....

Ajay Agyat's Photos

  • Add Photos
  • View All

Ajay Agyat's Videos

  • Add Videos
  • View All

Ajay Agyat's Blog

ग़ज़ल

ग़ज़ल के 4 अशआर 

सन्नाटों पर खूब सितम बरपाती है
मेरे भीतर तन्हाई चिल्लाती है
संकल्पों के मन्त्र मैं जब भी जपता हूँ
मंज़िल मेरे और निकट आ जाती है
पूरी क्षमता से जब काम नहीं करता
मेरी किस्मत भी मुझ पर झल्लाती है
हर पल तुझ को याद किया करता हूँ मैं
याद विरह के दंशों को सहलाती है

मौलिक व अप्रकाशित .... 

Posted on November 30, 2014 at 5:23pm — 9 Comments

ग़ज़ल

बचो इस से कि ये आफत बुरी है
नशा कैसा भी हो आदत बुरी है


पतन की ओर गर जाने लगे हो
यकीनन आपकी संगत बुरी है


कि सिगरेट मदिरा गुटका या कि खैनी
किसी भी चीज़ की चाहत बुरी है


हमें मालूम है मरना है इक दिन
मगर इस मौत की दहशत बुरी है


कमाया है जिसे इज्ज़त गँवा कर 
अजय अज्ञात वो दौलत बुरी है

मौलिक व अप्रकाशित 

Posted on October 15, 2014 at 5:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल

अंधेरों को मिटाने का इरादा हम भी रखते हैं

कि हम जुगनू हैं थोडा सा उजाला हम भी रखते हैं

अगर मौका मिला हमको ज़माने को दिखा देंगे

हवा का रुख बदलने का कलेज़ा हम भी रखते हैं 

हमेशा खामियां ही मत दिखाओ आइना बन कर

सुनो अच्छाइयों का इक खज़ाना हम भी रखते हैं



महकती है फिजायें भी चहक़ते हैं परिंदे भी

कि अपने घर में छोटा सा बगीचा हम भी रखते…

Continue

Posted on August 5, 2014 at 7:00am — 11 Comments

ग़ज़ल

मालूम है कि सांप पिटारे में बंद है
फिर भी वॊ डर रहा है क्यूँ कि अक्लमंद है

.

ये रंग रूप, नखरे,अदा तौरे गुफ्तगू
तेरी हरेक बात ही मुझको पसंद है

.

ये दिल भी एक लय में धड़कता है दोस्तो
सांसो का आना जाना भी क्या खूब छंद है

.

सोचा था चंद पल में ही छू लूँगा बाम को
पर हश्र ये है हाथ में टूटी कमंद है

.

दुश्वारियों से जूझते गुजरी है ज़िन्दगी
अज्ञात फिर भी हौसला अपना बुलंद है

.

मौलिक एवं अप्रकाशित.

Posted on August 1, 2014 at 8:30pm — 10 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post होश की मैं पैमाइश हूँ:........ग़ज़ल, पंकज मिश्र..........इस्लाह की विनती के साथ
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब, सबसे पहले आपकी ग़ज़ल के क़वाफ़ी के अर्थ देखते हैं…"
20 minutes ago
राज़ नवादवी commented on Sushil Sarna's blog post 3 क्षणिकाएँ....
"अनुभूतियाँ उक्केरती हैं जो आपकी क्षणिकाएँ, खुले नभ में जैसे चमकें हैं रात को मणिकाएं ! बहुत सुन्दर…"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

11212 11212. 11212. 11212हुई तीरगी की सियासतें उसे बारहा यूँ निहार कर ।कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे…See More
2 hours ago
राज़ नवादवी posted blog posts
3 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted blog posts
3 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post एक ग़ज़ल - शिज्जु शकूर
"जीने की चाह में हुआ बंजारा आदमी बस घूमता दिखे है मक़ामात से अलग। उम्दा शेर के साथ अच्छी ग़ज़ल।…"
3 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on Sushil Sarna's blog post 3 क्षणिकाएँ....
"बेहतरीन रचना।"
3 hours ago
क़मर जौनपुरी posted blog posts
5 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
5 hours ago
क़मर जौनपुरी commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब डॉ छोटेलाल सिंह साहब। खुशी हुई आपसे मिलकर।"
5 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल
"आदरणीय क़मर जौनपुरी साहब उम्दा गजल लिखने के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए, मेरी भी कर्मभूमि कर्रा…"
6 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post चन्द मुक्तक
"आदरणीय राणा जी बढ़िया मुक्तक लिखने के लिए बहुत बहुत बधाई"
6 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service