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5 जनवरी 2014 को रात्रि 8.45 बजे मेरी बिटिया ने जन्म लिया। मैं उसे माँ दुर्गा का प्रसाद मानता हूँ। पिता बनने का सुख ही कुछ दिव्यानुभूतिकारी होता है। गदगद् भाव से मैं अपनी पुत्री को माँ दुर्गा का स्वरूप मान कर एक घनाक्षरी छंद प्रस्तुत कर रहा हूँ-
*****************************
सुता रूप धार मात, गेह जो पधारी आप,
चरण युगल माथ, कोटिश: नवाता हूँ।
आह्लादकारी जन्म, किलकारी रही गूँज,
मुग्धकारी महतारी, आप गुन गाता हूँ॥
जैसे लिया जन्म मात, किया उपकार बहु,
वैसे जियो शत साल, हिय से मनाता हूँ।
जन उर ताप हारी, भव भय पार कारी,
प्रकृति स्वरूप तुम, मुग्ध गुन गाता हूँ॥

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 21, 2014 at 7:41pm
आदरणीय सत्य नारायन जी! बधाई, प्रतिक्रिया के लिये आपका हार्दिक आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 21, 2014 at 7:30pm
आदरणीय लक्ष्मन धामी जी! आपका बहुत बहुत आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 21, 2014 at 7:07pm
आदरणीय गिरिराज जी! आपका बहुत बहुत आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 21, 2014 at 7:04pm
आदरणीया कुन्ती जी! आपका बहुत बहुत आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 21, 2014 at 7:02pm
आदरणीया मीना जी! आपका हृदय तल से आभार।
Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on January 21, 2014 at 7:01pm
आदरणीय अखिलेश कृष्ण जी! रचना पर समय देने और बिटिया को मिले शुभाशीष के लिये मैं आपका हृदय से आभारी हूँ।
Comment by Satyanarayan Singh on January 21, 2014 at 10:54am
आ, विंधेश्वरी जी प्रथमतः कन्या रत्न प्राप्ति हेतु आपको हार्दिक बधाई. इस शुभ अवसर पर नवजात शिशु को दीर्घ आयुष्य एवं निरामय जीवन प्राप्त हो इन ढेरों मंगल काकामनाओं के साथ इस ख़ुशी में आप द्वारा रचित सुन्दर घनाक्षरी हेतु आपको ढेरो बधाई प्रेषित करता हूँ
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 21, 2014 at 7:31am

आदरणीय विन्ध्येश्वरी भाई , लाजवाब छन्द रचना और पुत्री रत्न की प्राप्ति , दोनो के लिये हार्दिक बधाइयाँ .

रहे सात जन्मों तक आशीष माता का
यही आशीष तुमको है एक भ्राता का

सुता के रूप आई मा तुम्हारे द्वार ये अच्च्छा
करे मान वर्धन, चिरंजीवी रहे है यही इच्च्छा


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 20, 2014 at 10:07pm

आदरणीय विन्ध्येश्वरी भाई , लाजवाब छन्द रचना और पुत्री रत्न की प्राप्ति , दोनो के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

Comment by coontee mukerji on January 20, 2014 at 3:17pm

बहुत सारी बधाएयों के साथ....विनय जी.सादर

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