For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरी अनकही बातों पर ऐतबार न कर.

जमाना बेताब है मुश्किलें पैदा करने को,

मेरी अनकही बातों पर ऐतबार न कर.

बढ़ते रहे दरमियाँ दिलों के बीच,

चाहत ये जमाने की कामयाब न कर.

एक लकीर है हमारे और उसके बीच,

डर है गुम  होने का, उसे पार न कर.

कल का सूरज किसने देखा है,

आ भर ले बाहों में इन्कार न कर.

यक़ीनन ढला ज़िस्म फौलाद के सांचें में,

पर दिल है शीशे का, तू वार न कर.

शक अपनों पर, परायों के खातिर,

यकीं नहीं है तो फिर प्यार न कर.

........मौलिक व अप्रकाशित..........

Views: 737

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 4, 2014 at 12:03pm

नीरज जी...................हम भले ही इस भ्रम में रहे कि हम करता है. परन्तु हम करता नहीं है ..............यह सहज तरीके से अनुभव किया जा सकता है...........इसमे कृष्ण को कहने और न कहने का सवाल ही नहीं उठता ...............आप मेरे लिए जितना सच है उतना ही कृष्ण मेरे लिए झूठ...............

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 4, 2014 at 11:35am

आदरणीय सौरभ जी......................बिलकुल..............आप सभी का बेशकीमती समय मिला हार्दिक आभार!..............

Comment by Neeraj Nishchal on February 4, 2014 at 11:35am

वाह वाह वाह अनिल भाई क्या बात कह दी
लिखते नहीं हैं लिख जाता है
यही तो मै भी कहना चाहता हूँ जिस तरह जीवन प्रभु का प्रसाद है हमारा प्रयास नही
उसी तरह कविता भी प्रभु का प्रसाद ही है हमारा प्रयास नही
लाइन में लग जाते हैं मिल जाता है , ये तो परम धन्यभाग है जैसे गीता में कृष्ण कहते हैं
कर्ता न बनो बल्कि हो जाओ शायद यही विकर्म है यही स्वधर्म ।

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 4, 2014 at 11:32am

आदरणीया!

........शुक्रिया

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 4, 2014 at 11:31am

आदरणीय नीरज जी ..................आपको अच्छा लगा हो यह अलग बात है पर मेरे लिए यह अच्छा नहीं क्योंकि इससे बेहतर हो सकता था और वो कला इस मंच से अपने अन्दर उतारनी है......

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 4, 2014 at 11:29am

आदरणीय गिरिराज जी.......................शुक्रिया ...........प्रयास किया ही नहीं मैं बस युहीं लिख गया...............

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 4, 2014 at 11:27am

आदरणीय अरुण जी.................................हार्दिक आभार........................जी अभी मुझे किसी भी रचना के बारे में कोई जानकारी नहीं है ....................मैं लिखता नहीं बल्कि लिख जाता है.............यह दिपदीय है यह भी मुझे यहाँ आकर मालूम हुआ......जो मेरे लिए अच्छी बात है. उम्मीद करता हूँ आगे भी बहुत कुछ आप लोगों से सिखने को मिलेगा.......


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 1, 2014 at 2:14am

बहुत खूब भाईजी..

भाई अरुनजी के कहे पर अवश्य ध्यान दीजियेगा. आपकी संभावनाओं को अर्थ मिल जायेंगे.

शुभ-शुभ

Comment by annapurna bajpai on January 27, 2014 at 6:05pm

आ0 अनिल जी सुंदर द्विपदीय आपको बहुत बधाई । 

Comment by Neeraj Nishchal on January 27, 2014 at 5:30pm

भाई अनिल जी नमस्कार बहुत अच्छा लिखा है ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service