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स्वागत तव ऋतुराज

ऋतुराज के स्वागत में पांच दोहे

स्वागत तव ऋतुराज

चंप पुष्प कटि मेखला, संग सुभग कचनार।
गेंदा बिछुआ सा फबे, गल जूही का हार।१।

.
बेला बाजूबंद सा, कंगन हरसिंगार।
गुलमोहर भर मांग में, करे सखी श्रृंगार ।२।

.
पहन चमेली मुद्रिका, नथिया सदाबहार।
गुडहल बिंदी भाल दे, मन मोहे गुलनार।३।

.
जूही गजरा केवडा, सजे सखिन के बाल।
तन मन को महका रही, मौलश्री की माल।४।

.
झुमका लटके कान में, अमलतास का आज।
इस अनुपम श्रृंगार से, स्वागत तव ऋतुराज।५।

-सत्यनारायण सिंह
(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Satyanarayan Singh on February 24, 2014 at 6:44pm
आदरणीय विजय निकोर जी सादर
दोहावली पर आपकी उपस्थिति एवं सराहना से रचना कर्म सार्थक हुआ अतएव सादर आभार आदरणीय
Comment by vijay nikore on February 20, 2014 at 2:20am

इन अति सुन्दर दोहों के लिए बधाई, आदरणीय।

Comment by Satyanarayan Singh on February 14, 2014 at 7:58pm
आ.डॉ आशुतोश मिश्र जी दोहे पसंद करने एवं बधाई हेतु आपका सादर आभार आदरणीय
Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 14, 2014 at 4:41pm

आदरणीय ऋतुराज के स्वागत में लिखे गए आपके ये सभी दोहे मुझे बेहद पसंद आये ...सत्यनारायण जी आपको तहे दिल बधाई ..सारर

Comment by Satyanarayan Singh on February 12, 2014 at 10:26am
रचना पर प्राप्त आपकी बधाई एवं सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार आदरणीय कल्पना रामानी जी सादर
Comment by Satyanarayan Singh on February 12, 2014 at 10:26am
रचना पर प्राप्त आपकी बधाई एवं सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार आदरणीय कल्पना रामानी जी सादर
Comment by कल्पना रामानी on February 11, 2014 at 10:30am

ऋतुराज के स्वागत में सुंदर बसंती दोहे बहुत भाए, हार्दिक बधाई आदरणीय सत्यनारायण जी  

Comment by Satyanarayan Singh on February 7, 2014 at 5:47pm
आदरणीय सुशिल सरना जी
आपकी सकारात्मक प्रतक्रिया हेतु आपका ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ
Comment by Satyanarayan Singh on February 7, 2014 at 5:45pm
आदरणीया डॉ प्राची जी, दोहावली पर आपकी उपस्थिति एवं सराहना से रचना कर्म सार्थक हुआ अतएव सादर आभार आदरणीया

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 7, 2014 at 12:50pm

ऋतुराज की शान में बहुत सुन्दर पुष्प सुगंधि बिखेरी है आपके सुन्दर दोहों ने 

बहुत बहुत बधाई..

कृपया ध्यान दे...

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