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भारत हमारा, कामरूप छंद

भारत हमारा

(कामरूप छंद)

भारत हमारा, देश न्यारा, सृष्टि का उपहार।

तहजीब अपनी, गंग जमुनी, नाज जिसपर यार।।

सीख दे ममता, और समता, कर्म गीता सार ।

जनतंत्र आगर, विश्व नागर, मानता संसार।।

सत्यनारायण सिंह

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Satyanarayan Singh on May 2, 2014 at 1:21pm

 परम आदरणीय आपके मार्गदर्शन में यह प्रयास संभव हुआ है अतएव आपका सादर आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 2, 2014 at 2:13am

संयत प्रयास के लिए बधाई आदरणीय..

Comment by Satyanarayan Singh on May 1, 2014 at 10:45am
सादर आभार आदरणीया डॉ. प्राची जी
Comment by Satyanarayan Singh on May 1, 2014 at 10:43am
सादर आभार आदरणीया डॉ. प्राची जी

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 1, 2014 at 7:50am

कामरूप छंद पर बहुत खूबसूरत प्रयास..

आतंरिक गेयता भी देखते ही बनती है 

हार्दिक बधाई इस सुन्दर सार्थक प्रस्तुति पर 

Comment by Satyanarayan Singh on April 30, 2014 at 8:28pm

आ, अखिलेश जी रचना की सराहना एवं बधाई हेतु आपका सादर आभार आदरणीय

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on April 25, 2014 at 1:46pm

आ. सत्यनारायण जी 

सुंदर छंद , हार्दिक बधाई 

Comment by Satyanarayan Singh on April 24, 2014 at 10:24pm

आ. जीतेन्द्र जी रचना सुन्दर लगी यह पढ़कर मन को सुखकर लगा आपका सादर आभार.

Comment by Satyanarayan Singh on April 24, 2014 at 10:23pm

आ. गिरिराज जी रचना की सराहना हेतु आपका ह्रदय से आभार आदरणीय

Comment by Satyanarayan Singh on April 24, 2014 at 10:22pm

आ. अरुण जी  बधाई एवं प्रोत्सह्न हेतु आपका ह्रदय से आभार

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