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याद तेरी आविनाशी!

याद तेरी आविनाशी!  

 आह प्रिये! धूमिल अब हो गयी

 याद तेरी अविनाशी!

 मिलन तुम्हारा बारहमासी  

 कभी लगा ना उबासी

 यादें तव मन मंदिर जग गयी  

 अलखन जगे जिमि काशी

 आह प्रिये! धूमिल अब हो गयी

 याद तेरी अविनाशी!

 संग तुम्हारा था मधुमासी

 मन ना छायी उदासी

 चाँद सितारों में जा बस गयी

 मधुर हँसी की उजासी 

 आह प्रिये! धूमिल अब हो गयी

 याद तेरी अविनाशी!

 मेरी दुनिया प्रेम पियासी

 रसमयी बात विलासी    

 छंद गीत कविता में ढल गयी

 याद तेरी आविनाशी!  

            -सत्यनारायण सिंह

            मौलिक व अप्रकाशित

 

 

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Comment by Satyanarayan Singh on May 9, 2014 at 4:54pm

सादर आभार आदरणीया डॉ. प्राची जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 1, 2014 at 1:07pm

 एक अलग तरह की प्रस्तुति

विरह संवेदना को खूबसूरती से जिया है 

सुन्दर रचना के लिए  हार्दिक बधाई

Comment by Satyanarayan Singh on April 30, 2014 at 8:43pm

आ. लडिवाला जी सादर प्रस्तुति पर आपकी सराहना हेतु आपका ह्रदय से आभार आदरणीय

Comment by Satyanarayan Singh on April 30, 2014 at 8:42pm

प्रस्तुति पर आपकी बधाई एवं प्रोत्साहन हेतु आपका हृदय से सादर आभार प्रकट करता हूँ आदरणीय डॉ. आशुतोष जी

Comment by Satyanarayan Singh on April 30, 2014 at 8:40pm

प्रस्तुति पर आपकी टिपण्णी से अभिभूत हूँ आदरणीया कुंती जी सादर आभार

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 28, 2014 at 8:28am

छंद गीत कविता में ढल गयी

 याद तेरी आविनाशी --------- वाह ! बहुत खूब 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 26, 2014 at 2:33pm

भावो से परिपूर्ण इस शानदार रचना के लिए तहे दिल बधाई सादर

Comment by coontee mukerji on April 25, 2014 at 4:22pm

बहुत ही भावपूर्ण प्रेम के प्रति समर्पित रचना....हार्दिक बधाई.

Comment by Satyanarayan Singh on April 24, 2014 at 10:17pm

आदरणीय गिरिराज भाई प्रस्तुति पर आपकी उत्साहित करती टिपण्णी एवं बधाई हेतु आपका दिल से आभारी हूँ आदरणीय

Comment by Satyanarayan Singh on April 24, 2014 at 10:14pm

प्रस्तुति पर आपकी बधाई एवं प्रोत्साहन हेतु आपका हृदय से सादर आभार प्रकट करता हूँ आदरणीय जितेन्द्र जी

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