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[वसंतपंचमी के पावन अवसर पर माँ सरस्वती के श्रीचरणों में श्रद्धा स्वरुप ये कविता-सुमन]

हे माँ सरस्वती!
तुमसे है मेरी विनती।
सदा करूँ तुम्हारी भक्ति,
यही वर दो भगवती।
हे माँ सरस्वती!
मेरे मनमंदिर में सदा
रहो, इसी तरह से माँ।
मुझे कभी छोड़ न देना,
किसी तरह से, हे माँ !
यही आशीष दो भगवती।
हे माँ सरस्वती !
सदा रखना मेरे मस्तक पर,
अपना हाथ,हे आदिशक्ति।
लीन रहूँ तुम्हारी साधना में,
करती रहूँ तुम्हारी भक्ति।
मुझे यही वर दो भगवती।
हे माँ सरस्वती !
अज्ञान का अन्धकार,
अब तो मिटा दो माता।
देकर ज्ञान संसार को,
प्रकाश फैला दो माता।
यही वर दो भगवती।
हे माँ सरस्वती !
ज्ञानमय हो संसार सारा,
सुन लो माँ मेरी प्रार्थना।
देकर तुम शुभाशीष,पूर्ण
कर दो ये मेरी कामना।
यही वर दो भगवती।
हे माँ सरस्वती !
'सावित्री राठौर'
[मौलिक एवं अप्रकाशित]

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 9, 2014 at 10:01am

ज्ञानमय हो संसार सारा,
सुन लो माँ मेरी प्रार्थना। 

 सादर  ऐसा हो जाए , 

संसार प्यारा हो जाए 

बधाई आपको 

Comment by Savitri Rathore on February 5, 2014 at 11:03pm

माँ सरस्वती की कृपा-दृष्टि ऐसे ही मुझ पर बनी रहे,बस यही कामना है। आपके इन प्यारे शब्दों हेतु आपका आभार मोहिनी जी !

Comment by Savitri Rathore on February 5, 2014 at 11:00pm

बहुत -बहुत आभार प्राची जी!

Comment by Savitri Rathore on February 5, 2014 at 10:59pm

धन्यवाद जितेन्द्र जी !

Comment by mohinichordia on February 5, 2014 at 7:58pm

  माँ सरस्वती के  प्रति आपकी भक्ति, आपका समर्पण अपना रंग दिखा रहा है | बड़ी ही सुन्दर रचना.   मेरी शुभकामनाएं आपको आ.  सावित्री जी .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 5, 2014 at 5:04pm

माँ शारदा को समर्पित इस भाव वंदन के लिए शुभकामनाएं आ० सावित्री राठौर जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 4, 2014 at 11:34pm

बसंत के पावन पर्व पर बहुत सुंदर प्रार्थना, बधाई आदरणीया सावित्री जी

Comment by Savitri Rathore on February 4, 2014 at 10:31pm

लक्ष्मणप्रसाद जी नमस्कार,इस सराहना हेतु आपका आभार !

Comment by Savitri Rathore on February 4, 2014 at 10:28pm

गिरिराज जी आपका बहुत - बहुत धन्यवाद !

Comment by Savitri Rathore on February 4, 2014 at 10:27pm

बहुत - बहुत आभार सरिता जी!

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