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नारी [अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक नारी विषयक कविता]

मेरा परिचय क्या है?
क्या एक मानवी का ?
अथवा किसी की दासी का,
क्या मेरा परिचय यही है?
कि मेरा कोई अस्तित्व नहीं है।
मैं बहुत कुछ होकर भी,
स्वयं में कुछ नहीं हूँ।
क्या पुरुष की सहचारिणी
होने के कारण,मैं अस्तित्वहीन हूँ?
क्या एक स्त्री होने के कारण,
मैं केवल अबला,असहाय हूँ?
क्या पत्नी होना कोई अभिशाप है,
जो स्त्री को पुरुष की दासी बना देता है,
अथवा पुरुष सर्वश्रेष्ठ है,
जो स्त्री और प्रकृति सबका
अधिकारी बन जाना चाहता है।
जो चाहता ही नहीं कि उससे
पृथक नारी की कोई सत्ता हो?
जो चाहता है कि वही उसका
अधिकारी हो और वह मात्र
उसकी दासी हो,उसकी अनुचरी हो।
वह नारी का सर्वस्व हो,
किन्तु नारी का उस पर
किंचित मात्र भी अधिकार न हो।
नारी तो उसके लिए भोग्या है,
सेविका है,सहायिका है,समर्पिता है।
किन्तु वह स्वयं कब -कब
समर्पित हुआ है नारी के सम्मुख?
वह कब सहयोगी बना है नारी के लिए?
समर्पण तो केवल नारी के लिए है,और
पुरुष;उसके लिए तो केवल अधिकार है,
नारी को भोगने का,उसे पीड़ित करने का।
उसे मात्र प्रताड़ित करने का,
उस पर अधिकार जताने का,
उसके मन को जलाने का,
उसकी उपेक्षा करने का,
उसकी भत्र्र्र्र्र्सना करने का,
उसे अपमानित करने का,
उसका बलात्कार करने का।
'सावित्री राठौर'
[मौलिक एवं अप्रकाशित]

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 9, 2014 at 9:59am

आदरणीया सावित्री जी 

आपकी रचना पढ़ी . अच्छे प्रश्न .

समय बहुत बदल गया है. नारी का सम्मान सदेव रहा है. अपवाद हर क्षेत्र में होता है. बैसाखी के सहारे  चलना त्याग दें. वर्ना कमजोर दिखने पर लाभ लेने वालों की कमी नही है. 

सादर बधाई. 

Comment by Savitri Rathore on March 12, 2014 at 8:15pm

गिरिराज जी,आपका आभार !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 11, 2014 at 9:44pm

सुन्दर भाव अभिव्यक्ति के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ , आदरणीया सावित्री जी ॥

Comment by Savitri Rathore on March 11, 2014 at 4:10pm

आ० जितेन्द्र जी, आपके प्रतिक्रिया व्यक्त करने हेतु आपका आभार !

Comment by Savitri Rathore on March 11, 2014 at 4:09pm

आ०  कल्पना जी सादर नमस्कार !
उत्साहवर्धन हेतु आपकी आभारी हूँ,ऐसे ही स्नेह बनाये रखिये।

Comment by Savitri Rathore on March 11, 2014 at 4:07pm

आ० शिज्जू जी,सराहना हेतु आपका आभार !

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 11, 2014 at 7:43am

इस सुंदर भावपूर्ण रचना पर हार्दिक बधाई आदरणीया सावित्री जी

Comment by कल्पना रामानी on March 10, 2014 at 11:10pm

आदरणीया सावित्री जी, मन के भावों को बहुत मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया है आपने। इस भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 10, 2014 at 8:24am

आदरणीया सावित्री जी इस रचना के लिये बधाई स्वीकार करें

कृपया ध्यान दे...

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