For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

   मन बौराया

कंगना खनका

मन बौराया

ऐसा लगता फागुन आया ।

रूप चंपयी

पीत बसन

फैली खुशबू

ऐसा लगता

यंही कंही  है चन्दन वन ।

पागल मन

उद्वेलित करने

अरे कौन चुपके से आया ?

पनघट पर

छम छम कैसा यह !

कौन वहाँ रह – रह बल खाता ?

मृगनयनी वह परीलोक की

या है वह  –

सोलहवां सावन !

मन का संयम

टूटा जाये

देख देख यौवन गदराया ।

कंगना खनका

मन बौराया

ऐसा लगता फागुन आया ।

  ---- मौलिक एवं अप्रकाशित ---

Views: 784

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by S. C. Brahmachari on February 26, 2014 at 8:26pm

रचना की प्रशंसा के लिए आपका हार्दिक आभार डॉ प्राची बहन !

फागुन के मौसम मे बौराये मन को वर्ण भेद का ध्यान रह कहाँ जाता है ?

फिर भी आप द्वारा उठाए गए  बिन्दु पर विद्वतजनों का मार्ग दर्शन अवश्य चाहूँगा ।

पुनश्च रचनाओं पर की जा रही आपकी  समीक्षात्मक टिप्पणी की हार्दिक प्रशंसा करता हूँ ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 25, 2014 at 2:11pm

कंगन की खनक और पायल की झंकार से तरंगित फाल्गुल के मन को मतवाला कर देने वाली इस प्रस्तुति के लिए आदरणीय ब्रह्मचारी जी आपको हार्दिक शुभकामनाएं 

मुझे लगता है इन पंक्तियों को स्त्रीलिंग में कहा जाना चाहिए 

पनघट पर

छम छम कैसा यह !

कौन वहाँ रह – रह बल खाता ?....शायद सहमत हों !

Comment by S. C. Brahmachari on February 24, 2014 at 10:20pm

श्रद्धेय योगराज प्रभाकर जी ,

आपकी प्रशंसा से मन फागुनी हुआ जाता है । मन रंगो से खेल रहा , देखूँ अब क्या ले कर आता है । हार्दिक आभार !


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on February 24, 2014 at 5:22am

फागुन के दिलकश रंगों से सराबोर इस भावपूर्ण कविता के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आ० ब्रह्मचारी जी.

Comment by S. C. Brahmachari on February 23, 2014 at 10:25pm

डॉ0 आशुतोष मिश्रा जी ,
मन को छू लेनेवाली रचना की प्रशंसा के लिए आपका आभार !

Comment by S. C. Brahmachari on February 23, 2014 at 10:17pm
बहन अन्नपूर्णा जी,
रचना की प्रशंसा के लिए आभार !
Comment by S. C. Brahmachari on February 23, 2014 at 10:15pm
श्री राम शिरोमणि पाठक जी,
रचना ने आनंद प्रदान किया, जानकर अच्छा लगा । फागुन आपको और आनंदित करे ऐसी कामना है ।
आभार !
Comment by S. C. Brahmachari on February 23, 2014 at 10:07pm
श्री श्याम नारायण वर्मा जी,
हार्दिक आभार !
Comment by S. C. Brahmachari on February 23, 2014 at 10:04pm
श्री लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाला जी,

रचना की प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार स्वीकार करें ।
Comment by S. C. Brahmachari on February 23, 2014 at 9:58pm
भाई जीतेंद्र गीत जी,
फाल्गुनी रचना की प्रशंसा के लिए आभार स्वीकारें !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
6 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
20 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service