For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बदला हुआ नजारा क्यूँ खुद आप सोचिये

२२१२ १२२२ २२१ २१२

वो बज्म में यूं तनहा क्यूँ खुद आप सोचिये

वो मैकदे मैं प्यासा क्यूँ खुद आप सोचिये

 

सूरज फलक पे आता है हर रोज वक़्त पर

फिर भी रहा अँधेरा क्यूँ खुद आप सोचिये

 

बचपन जवान होने से पहले ज़वाँ हुए

है बात इक इशारा क्यूँ खुद आप सोचिये

 

भरपूर तेल बाती भी दमदार थी मगर

किस ने दिया बुझाया क्यूँ खुद आप सोचिये

 

कांधा जो देने आया था हर शख्स गैर था

खुद को ही यूं मिटाया  क्यूँ खुद आप सोचिये

 

पी आग उम्र भर यूं ही जलता रहा हूँ मैं

अपना वदन जलाया क्यूँ खुद आप सोचिये

 

चलने की कोशिशों में मैं माना फिसल गया

पर यूं हँसा जमाना क्यूँ खुद आप सोचिये  

 

जो हँस रहे थे हाथों में ले हार हैं खड़े

बदला हुआ नजारा क्यूँ खुद आप सोचिये

 

मौलिक व अप्रकाशित

डॉ आशुतोष मिश्र 

Views: 717

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 7, 2014 at 11:41pm

जो हँस रहे थे हाथों में ले हार हैं खड़े

बदला हुआ नजारा क्यूँ खुद आप सोचिये.. ... . .इस शेर को तकाबुले रदीफ़ से बचालिया होता तो एक दमदार कहन साझा करता हुआ शेर हुआ है.

दाद कुबूल कीजिये, आदरणीय आशुतोष भाईजी..

सादर

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 1, 2014 at 11:30am

आदरणीय लक्षमण जी ..आपके स्नेहिल शब्दों के लिए तहे दिल धन्यवाद ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 1, 2014 at 11:25am

आदरणीय विजय सर ...बस आपका आशीर्वाद यूं ही मिलता रहे 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 1, 2014 at 11:25am

आदरणीय गिरिराज भाईसाब...मुझे आपकी स्नेह की सदैव जरूरत है ..आपके स्नेहिल शब्दों के लिए तहे दिल धन्यवाद 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 1, 2014 at 11:17am

आदरणीया अन्नपूर्णा जी ..स्नेहिल इन शब्दों  के लिए तहे दिल धन्यवाद सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 1, 2014 at 11:14am

आदरणीय भुवन जी .. आदरणीय जीतेन्द्र जी ...उत्साहवर्धक इन शब्दों के लिए तहे दिल ध्न्यवाद सादर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 1, 2014 at 10:38am

आदरणीय भाई आशुतोष जी इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए कोटि कोटि बधाई कबूल करें .

Comment by vijay nikore on April 1, 2014 at 10:19am

इस अच्छी गज़ल के लिए बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 1, 2014 at 9:58am

आदरनीय आशुतोश भाई , बहुत अच्छी गज़ल कही है , इतने भारी रदीफ को निभाना आसान काम नही है  !! आपको तहे दिल से बधाइयाँ ॥

Comment by annapurna bajpai on March 31, 2014 at 11:28pm

बहुत खूब !! आ0 आशुतोष जी बधाई आपको इस सुंदर गजल के लिए । 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
yesterday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service