For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

  “अरे! रामेश्वर भाई..समझ नही आता क्या करें ? किस को क्या समझाएं ? किस दुःख में शामिल होने चलें?”

“सही कह रहे हो..तुम किशन भाई, वहां बेचारे दीनानाथ जी का शव अंतिम संस्कार की राह देख रहा है और उनके चारों बेटे आपस में बटवारे को लेकर झगड़ रहे है..”

" हाँ भाई..! रामेश्वर ,  दीनानाथ जी ने अपनी अर्थी के लिए चार काँधे तैयार किये थे, न जाने क्या कमी रह गई "

 

   जितेन्द्र 'गीत'

(मौलिक व् अप्रकाशित)

 

Views: 1184

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 3, 2014 at 1:07am

आज के समय में गलत संस्कार , बाजारू संस्कृति और अविश्वास के साथ-साथ इंसान ने अपने अन्दर की आतुरता, जो केवल कुछ सुख पाने के लिए  निर्मित कर रखी है वो भी उसे सही समय या  निर्णय लेने के लिए गंभीर नही बनने देती है .

आपकी बधाई शिरोधार्य है आदरणीय सौरभ जी, स्नेह व् मार्गदर्शन बनाये रखियेगा

सादर! 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 3, 2014 at 12:47am

जैसी सोच वैसा परिवार. जैसे परिवार वैसा समाज. ऐसे में ही कहना पड़ जाता है - को बड़-छोट कहत अपराधू.. 

पिता द्वारा डाले गये संस्कार, आजकी बाज़ारू संस्कृति का भारी दवाब और आपसी अविश्वास, ये तीनों मिलकर और क्या तस्वीर प्रस्तुत कर सकते हैं ?  टीस-सी उभर आयी.  

लघुकथा पर सार्थक प्रयास के लिए बधाई !

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 11, 2014 at 1:39pm

आपकी प्रतिक्रिया //पूरा चित्र आँखों के आगे तैर गया..// से रचना को सार्थकता का प्रमाण मिलता है,  बधाई सहर्ष शिरोधार्य है .आपका ह्रदय से आभार आदरणीया डा.प्राची जी. स्नेहिल आशीर्वाद बनाये रखियेगा

सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 11, 2014 at 7:59am

उफ़!  उफ़ !

पूरा चित्र आँखों के आगे तैर गया..

सधे हुए कम शब्दों में एक सार्थक सामाजिक कथ्य साँझा करती लघुकथा 

हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति पर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 10, 2014 at 10:41pm

आपकी उत्साहवर्धक  सराहना हेतु आपका ह्रदय से आभार आदरणीया अन्नपूर्णा दीदी, स्नेहिल आशीर्वाद बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 10, 2014 at 10:39pm

आपने सही कहा आदरणीया मीना दीदी, यह एक कड़वा सच ही है. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया मेरा मनोबल बढाती रही है, आपका ह्रदय से आभार , स्नेहिल आशीर्वाद बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 10, 2014 at 10:27pm

रचना आपको रुचिकर लगी, लेखनकर्म सार्थक  हुआ आदरणीय विशाल जी, आपका हार्दिक आभार . स्नेह बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by annapurna bajpai on April 10, 2014 at 10:27pm

सुंदर लघु कथा , बधाई आपको आ0 जितेंद्र जी । 

Comment by Meena Pathak on April 10, 2014 at 5:16pm

कड़वा सच .....कम शब्दों मे बहुत कुछ कह गये आप .. बधाई 

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on April 9, 2014 at 11:35pm

वाह.... कुछ पंक्तियों में लिखी इस लघु कथा के माध्यम से एक बहुत बड़ी और सोचनीय बात कहने की कोशिश की है.... आखिरी पंक्ति मन - मन - मस्तिष्क को बहुत देर तक झंकृत करने में स्क्षम !!!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
5 hours ago
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service