For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कैसी शुष्कता है?

जो धूप में

बदन झुलसा रही..

भीतर इतनी आग

विरह की जो

केवल धुआँ

और धुआँ देती है

राख तक नसीब नहीं

जिसे रख दूँ संजो कर

तेरी हथेली पर

जब मिलन की बेला हो

और कहूँ कि....

यह पाया मैंने

तुझ बिन...!

     जितेन्द्र ' गीत '

( मौलिक व् अप्रकाशित )

 

Views: 1195

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 3, 2014 at 9:20pm

आपकी बधाई हृदयतल से स्वीकार है आदरणीय सौरभ जी, मैंने जो कुछ भी लिखा यहीं ओ बी ओ परिवार के सानिध्य में ही सीखा है आप सभी के स्नेह व् मार्गदर्शन से ही मेरी भावनाओं को शब्द मिले है.

सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 2, 2014 at 1:58am

क्या लिखने लगे हैं भाईजी !!...... 

दिल से बधाई.. .

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 30, 2014 at 11:48pm

आपने रचना के भावों को छुआ, आपकी संवेदनशीलता को नमन आदरणीय आशीष जी. स्नेह बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 30, 2014 at 11:44pm

रचना पर आपके सराहनीय अनुमोदन से बहुत संबल मिला आदरणीया विन्दु बाबु जी, आपका बहुत बहुत आभार

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 30, 2014 at 11:37pm

आपकी उत्साहवर्धक सराहना से मुझे बहुत ख़ुशी व् लेखनकर्म को अति मनोबल मिला है आदरणीया डा.प्राची जी, आपका ह्रदय से आभार

सादर!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 30, 2014 at 11:35pm

आह... खूबसूरत | संवेदनशील रचना.. हर किसी को अपनों की अहमियत समझनी चाहिए |

अच्छा सन्देश |

Comment by Vindu Babu on April 30, 2014 at 10:53pm

आदरणीय जितेन्द्र जी:

विरह की वेदना को अच्छे ढंग से उकेरा है अपने ।

आपको हार्दिक बधाई इस सघन अभिव्यक्ति के लिए।

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 30, 2014 at 10:08pm

विरह में व्याप्त सूनेपन और रह जाते खाली हाथों को बहुत मार्मिक शब्द मिले हैं 

इस भाव सान्द्र प्रस्तुति पर मेरी बधाई स्वीकारिये 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 28, 2014 at 12:29pm

आपकी बधाई सहर्ष स्वीकार है आदरणीया मीना दीदी, अपना स्नेहिल आशीर्वाद बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by Meena Pathak on April 28, 2014 at 10:59am

कम शब्दों में बहुत कुछ ......

बहुत बहुत बधाई ... स्नेहाशीष

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service