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“माँ !  मैं तुम्हारे और दोनों भाइयों के हाथ जोडती हूँ, मुझे कुछ पैसे दे दो या दिलवा दो.. भगवान् के लिए मदद करो.. चार दिनों बाद बेटी की शादी है..”

“देखो दीदी..! .. हमने हर समय तुम्हारा बहुत साथ दिया है.. यहाँ तक कि तुम्हारी दोनों बेटियों की शादी का पूरा खर्च वहन करने की सोचे थे. बेटे को भी काम-धंधे पर लगवा देंगे..  लेकिन तुमने निकम्मे जीजाजी.. और लोगो के कहने पर हम पर ही मुकदमा दायर कर दिया.. ? क्या तो हिस्सा पाने की खातिर ?!! ”

“माँ, तुम तो कुछ बोलो, तुम्ही समझाओ न.. इन दोनों को.. ”

“ बेटी..! मैं क्या समझूँ.. मैं क्या समझाऊँ ? यह सब तो तुम्हें सोचना था. ये जो तेरे भाइयों को पैसा मिला है न.. वो बाँध में जमीनों के डूबने के ऊपर पुनर्स्थापन का पैसा है..   और, मुझे तो इन्हींके साथ रहना है.. “

जितेंद्र  'गीत'
(मौलिक व्   अप्रकाशित )

   

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 22, 2014 at 8:13am

आपको रचना पसंद आई, लेखनकर्म सार्थक हुआ आदरणीय विजय निकोर जी. आपका ह्रदय से आभार

सादर!

Comment by vijay nikore on June 19, 2014 at 1:46pm

आपकी लघु कथा बहुत ही अच्छी लगी। बधाई, आदरणीय जितेन्द्र जी।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 18, 2014 at 11:57am

रचना पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया हेतु आपका ह्रदय से आभारी हूँ आदरणीय सौरभ जी, स्नेह व् मार्गदर्शन बनाये रखियेगा

सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 18, 2014 at 2:14am

एक सार्थक प्रस्तुति के लिए हृदय से धन्यवाद, जितेन्द्र भाई.. .

शुभेच्छाएँ

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 12, 2014 at 11:15pm

आपका बहुत बहुत आभार आदरणीया अन्नपूर्णा दीदी

सदर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 12, 2014 at 11:14pm

आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार आदरणीय गिरिराज जी

सादर!

Comment by annapurna bajpai on June 12, 2014 at 7:26pm

 सुंदर लघु कथा !! बहुत बधाई आपको प्रिय जितेंद्र जी । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 12, 2014 at 5:47pm

आदरणीय जितेन्द्र भाई , सच मे आज समाज मे नारी की की स्थिति ऐसी ही है , जाये तो किधर जाये । सुन्दर सार्थक पस्तुति के लिये बधाइयाँ ॥

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 12, 2014 at 1:53pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीय डा. गोपाल जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 12, 2014 at 1:52pm

आपकी बधाई सहर्ष स्वीकार है आदरणीया डा. प्राची जी, आपका हार्दिक आभार

सादर!

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