For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दोहा सलिला मुग्ध संजीव 'सलिल'

दोहा सलिला मुग्ध  ***संजीव 'सलिल***

 

दोहा सलिला मुग्ध है, देख बसंती रूप.

शुक प्रणयी भिक्षुक हुआ, हुई सारिका भूप..

 

चंदन चंपा चमेली, अर्चित कंचन-देह.

शराच्चन्द्रिका चुलबुली, चपला करे विदेह..

 

नख-शिख, शिख-नख मक्खनी, महुआ सा पीताभ.

पाटलवत रत्नाभ तन, पौ फटता अरुणाभ..

 

सलिल-बिंदु से सुशोभित, कृष्ण कुंतली भाल.

सरसिज पंखुड़ी से अधर, गुलकन्दी टकसाल..

 

वाक् सारिका सी मधुर, भौंह-नयन धनु-बाण.

वार अचूक कटाक्ष का, रुकें न निकलें प्राण..

 

देह-गंध मादक मदिर, कस्तूरी अनमोल.

ज्यों गुलाब-जल में 'सलिल', अंगूरी दी घोल..

 

दस्तक कर्ण कपट पर, देते रसमय बोल.

वाक्-माधुरी हृदय से, कहे नयन-पट खोल..

 

दाड़िम रद-पट मौक्तिकी, संगमरमरी श्वेत.

रसना मुखर सारिका, पिंजरे में अभिप्रेत..

 

वक्ष-अधर रस-गगरिया, सुख पा कर रसपान.

बीत न जाये उमरिया, शुष्क न हो रस-खान..

 

रसनिधि हो रसलीन अब, रस बिन दुनिया दीन.

तरस न तरसा, बरस जा, गूंजे रस की बीन..

 

रूप रंग मति निपुणता, नर्तन-काव्य प्रवीण.

बहे नर्मदा निर्मला, हो न सलिल-रस क्षीण..

 

कंठ सुराहीदार है, भौंह कमानीदार.

पिला अधर रस-धार दो, तुमसा कौन उदार..

 

रूपमती तुम, रूप के कद्रदान हम भूप.

तृप्ति न पाये तृषित गर, व्यर्थ 'सलिल' जल-कूप..

 

गाल गुलाबी शराबी, नयन-अधर रस-खान.

चख-पी डूबा बावरा, भँवरा पा रस-दान..

 

जुही-चमेली वल्लरी, बाँहें कमल मृणाल.

बंध-बँधकर भुजपाश में, होता 'सलिल' रसाल..

 

**************************

Acharya Sanjiv Salil

Views: 491

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 22, 2011 at 7:34pm

वाक् सारिका सी मधुर, भौंह-नयन धनु-बाण.

वार अचूक कटाक्ष का, रुकें न निकलें प्राण..

 

वाह वाह आचार्य जी , रुके न निकले प्राण .... यह काफी शानदार रहा ,

 

सभी के सभी दोहे एक से बढ़कर एक , बहुत बहुत बधाई आचार्य जी इस खुबसूरत दोहों के लिये |

Comment by Abhinav Arun on February 22, 2011 at 10:17am
भावपूर्ण , मनोरम दोहे | मन सुरभित और चमत्कृत हुआ |
Comment by Dr Nutan on February 21, 2011 at 5:03pm
बहुत सुन्दर रचना सलिल जी.... अद्भुत वर्णन ...वाह
Comment by Dr Nutan on February 21, 2011 at 5:02pm
बहुत सुन्दर रचना सलिल जी... अद्भुत ...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
12 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service