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सावन का था महीना .....

सावन का था महीना ......

वो आ के छम्म से बैठी मेरे करीब ऐसे
बरसी हो बादलों से सावन की बूंदें जैसे

सावन का था महीना
मदहोश थी ...हसीना
गालों पे .लग रही थी
हर बूँद ..इक नगीना

आँचल निचोड़ा उसने ..मेरे करीब ऐसे
बरसी हो बादलों से ख़्वाबों की बूंदें जैसे

पलकें झुकी हुई थीं
सांसें ..रुकी हुई थीं
लब थरथरा .रहे थे
पायल थकी हुई थी

इक इक कदम वो मेरे आई करीब ऐसे
बादे सबा को छू के ...आई हों बूंदें जैसे

वो भीगी प्रेम दीवानी
हो जैसे ..प्रेम कहनी
रुखसार पे ...थे गेसू
जैसे साँझ हो सुहानी

आगोश में शरारा ....वो आया करीब ऐसे
सिमटी हों सांसें उसकी बाहों में मेरी जैसे

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on June 4, 2016 at 12:56pm

आदरणीया कांता रॉय जी प्रस्तुति पर  आपके द्वारा प्रदत्त आत्मीय का हार्दिक आभार। अचरज है जिसे मैं भूल चूका उसे आपने याद दिला दिया। ये वो प्रस्तुति है जिसे मैंने स्कूटर पर आफिस जाते समय तैयार किया था। इसकी धुन भी कव्वाली शैली में बड़ी प्यारी बनी थी। जो यहां मुमकिन नहीं है। ब्लॉग के इस पृष्ठ तक जाने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by kanta roy on June 4, 2016 at 10:49am

वो आ के छम्म से बैठी मेरे करीब ऐसे 
बरसी हो बादलों से सावन की बूंदें जैसे----- इस  भाव  को  शायद  आपसे  बेहतर  कोई  नहीं  लिख  सकता  है  आदरणीय सुशील   सरना  जी , बहुत  बहुत बधाई  आपको 

Comment by Sushil Sarna on June 29, 2014 at 8:07pm

आदरणीय JAWAHAR LAL SINGH  रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का हार्दिक आभार  

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 29, 2014 at 7:32pm

आँचल निचोड़ा उसने ..मेरे करीब ऐसे 
बरसी हो बादलों से ख़्वाबों की बूंदें जैसे

बहुत खूब!

Comment by Sushil Sarna on June 29, 2014 at 1:44pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी  जी रचना पर आपके स्नेह का हार्दिक आभार 

Comment by Sushil Sarna on June 29, 2014 at 1:44pm

डॉ आशुतोष मिश्रा जी रचना पर आपके स्नेह का हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 29, 2014 at 10:47am

आदरणीय  सुशील भाई , सुन्दर श्रावनी शृंगार गीत रचना के लिये बधाई ॥

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 28, 2014 at 1:37pm

सावन का था महीना 
मदहोश थी ...हसीना 
गालों पे .लग रही थी 
हर बूँद ..इक नगीना....क्या बात है 

मादकता में डुबोने बाली इस रचना के लिए तहे दिल बधाई सादर 

Comment by Sushil Sarna on June 27, 2014 at 2:35pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी  रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का हार्दिक आभार  

Comment by Sushil Sarna on June 27, 2014 at 2:34pm

आदरणीया सावित्री राठौड़  जी रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का हार्दिक आभार  

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