For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सावन का था महीना .....

सावन का था महीना ......

वो आ के छम्म से बैठी मेरे करीब ऐसे
बरसी हो बादलों से सावन की बूंदें जैसे

सावन का था महीना
मदहोश थी ...हसीना
गालों पे .लग रही थी
हर बूँद ..इक नगीना

आँचल निचोड़ा उसने ..मेरे करीब ऐसे
बरसी हो बादलों से ख़्वाबों की बूंदें जैसे

पलकें झुकी हुई थीं
सांसें ..रुकी हुई थीं
लब थरथरा .रहे थे
पायल थकी हुई थी

इक इक कदम वो मेरे आई करीब ऐसे
बादे सबा को छू के ...आई हों बूंदें जैसे

वो भीगी प्रेम दीवानी
हो जैसे ..प्रेम कहनी
रुखसार पे ...थे गेसू
जैसे साँझ हो सुहानी

आगोश में शरारा ....वो आया करीब ऐसे
सिमटी हों सांसें उसकी बाहों में मेरी जैसे

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 771

Facebook

You Might Be Interested In ...

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on June 4, 2016 at 12:56pm

आदरणीया कांता रॉय जी प्रस्तुति पर  आपके द्वारा प्रदत्त आत्मीय का हार्दिक आभार। अचरज है जिसे मैं भूल चूका उसे आपने याद दिला दिया। ये वो प्रस्तुति है जिसे मैंने स्कूटर पर आफिस जाते समय तैयार किया था। इसकी धुन भी कव्वाली शैली में बड़ी प्यारी बनी थी। जो यहां मुमकिन नहीं है। ब्लॉग के इस पृष्ठ तक जाने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by kanta roy on June 4, 2016 at 10:49am

वो आ के छम्म से बैठी मेरे करीब ऐसे 
बरसी हो बादलों से सावन की बूंदें जैसे----- इस  भाव  को  शायद  आपसे  बेहतर  कोई  नहीं  लिख  सकता  है  आदरणीय सुशील   सरना  जी , बहुत  बहुत बधाई  आपको 

Comment by Sushil Sarna on June 29, 2014 at 8:07pm

आदरणीय JAWAHAR LAL SINGH  रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का हार्दिक आभार  

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 29, 2014 at 7:32pm

आँचल निचोड़ा उसने ..मेरे करीब ऐसे 
बरसी हो बादलों से ख़्वाबों की बूंदें जैसे

बहुत खूब!

Comment by Sushil Sarna on June 29, 2014 at 1:44pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी  जी रचना पर आपके स्नेह का हार्दिक आभार 

Comment by Sushil Sarna on June 29, 2014 at 1:44pm

डॉ आशुतोष मिश्रा जी रचना पर आपके स्नेह का हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 29, 2014 at 10:47am

आदरणीय  सुशील भाई , सुन्दर श्रावनी शृंगार गीत रचना के लिये बधाई ॥

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 28, 2014 at 1:37pm

सावन का था महीना 
मदहोश थी ...हसीना 
गालों पे .लग रही थी 
हर बूँद ..इक नगीना....क्या बात है 

मादकता में डुबोने बाली इस रचना के लिए तहे दिल बधाई सादर 

Comment by Sushil Sarna on June 27, 2014 at 2:35pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी  रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का हार्दिक आभार  

Comment by Sushil Sarna on June 27, 2014 at 2:34pm

आदरणीया सावित्री राठौड़  जी रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का हार्दिक आभार  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Saturday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service